चंडीगढ़: कभी देश के शिक्षा मानचित्र पर पिछड़ने वाले राज्यों में गिना जाने वाला पंजाब आज पूरे देश के लिए एक बड़ी मिसाल बनकर उभरा है। एक समय था जब पंजाब के सरकारी स्कूलों की खस्ता हालत और गिरती शिक्षा व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे थे। वर्ष 2016-17 में राष्ट्रीय रैंकिंग में 22वें स्थान पर रहने वाला पंजाब 2020 तक गिरकर 27वें स्थान पर पहुंच गया था।
लेकिन, हालिया वर्षों में हुए क्रांतिकारी बदलावों के दम पर पंजाब ने नया इतिहास रच दिया है। नीति आयोग की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 के अनुसार, पंजाब ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे अग्रणी राज्यों को पछाड़ते हुए देशभर में पहला स्थान हासिल किया है।
छात्रों के सीखने के स्तर (Learning Outcomes) में भारी सुधार
नीति आयोग की रिपोर्ट के आंकड़े गवाह हैं कि पंजाब में बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। केरल जैसे साक्षर राज्य के मुकाबले पंजाब का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:
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तीसरी कक्षा (भाषा कौशल): पंजाब के बच्चों ने 82% दक्षता हासिल की, जबकि केरल 75% पर रहा।
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तीसरी कक्षा (गणित): पंजाब के छात्र 78% पर रहे, जबकि केरल के छात्र 70% तक ही पहुंच सके।
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नौवीं कक्षा (गणित): यहाँ भी पंजाब के छात्रों ने 52% परिणाम दर्ज किया, जबकि केरल 45% पर ही सिमट गया।
डिजिटल और आधुनिक सुविधाओं से लैस हुए स्कूल
संसाधनों की कमी से जूझने वाले पंजाब के सरकारी स्कूल आज हाईटेक हो चुके हैं। बुनियादी ढांचे के मामले में पंजाब ने अपने पड़ोसी राज्य हरियाणा को भी काफी पीछे छोड़ दिया है:
| सुविधाएं | पंजाब की स्थिति | हरियाणा की स्थिति |
| बिजली आपूर्ति | लगभग 100% स्कूलों में | – |
| स्मार्ट क्लासरूम | 80.1% स्कूलों में | 50.3% |
| इंटरनेट कनेक्टिविटी | 88.9% स्कूलों में | 78.9% |
| कार्यरत कंप्यूटर | 99% स्कूलों में | – |
वैश्विक स्तर का शिक्षक प्रशिक्षण और नई भर्तियाँ
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इंटरनेशनल ट्रेनिंग: शिक्षा प्रणाली को विश्वस्तरीय बनाने के लिए पंजाब सरकार ने अपने शिक्षकों को फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में विशेष ट्रेनिंग के लिए भेजा।
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रोजगार: राज्य सरकार द्वारा अब तक 13 हजार से अधिक शिक्षकों और अन्य सहयोगी स्टाफ की पारदर्शी भर्ती की जा चुकी है।
प्रतियोगी परीक्षाओं (JEE/NEET) में सरकारी स्कूल के छात्रों का डंका
उचित अवसर और संसाधन मिलने पर सरकारी स्कूल के छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है:
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786 छात्रों ने देश की प्रतिष्ठित JEE Main परीक्षा क्रैक की।
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1284 छात्रों ने NEET परीक्षा में सफलता हासिल कर डॉक्टर बनने की राह चुनी।
बदलाव के मुख्य स्तंभ: ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ और ‘इंग्लिश एज’
118 स्कूल ऑफ एमिनेंस: राज्य में 118 आधुनिक ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ स्थापित किए गए हैं, जहाँ बच्चों को उन्नत प्रयोगशालाएँ (Labs), आधुनिक तकनीक और बेहतरीन माहौल मिल रहा है।
इंग्लिश एज (English Edge): लगभग 3 लाख छात्रों के लिए यह विशेष प्रोग्राम शुरू किया गया है, ताकि सरकारी स्कूलों के बच्चों की अंग्रेजी भाषा क्षमता को मजबूत किया जा सके।
सरकारी स्कूलों पर फिर लौटा जनता का भरोसा
इस कायाकल्प का सबसे बड़ा और सुखद परिणाम यह हुआ है कि अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अभिभावकों का भरोसा सरकारी स्कूलों पर वापस लौट आया है। बड़ी संख्या में लोग प्राइवेट स्कूल छोड़कर अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में करा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दूरदर्शी नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के चलते पंजाब के सरकारी स्कूल अब सिर्फ पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के सुनहरे भविष्य की उम्मीद बन चुके हैं।