चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के विकास, कर्मचारियों, वाहन मालिकों और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कई ऐतिहासिक फैसलों पर मुहर लगाई गई। कैबिनेट ने जहां एक तरफ नई ‘मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी’ (MOTP-2026) को मंजूरी दी, वहीं दिल्ली-NCR क्षेत्र में प्रदूषण कम करने और वाहन मालिकों को राहत देने के लिए ‘नया सफर योजना’ की शुरुआत की है। इसके अलावा शहरी विकास और पंचायती राज से जुड़े संशोधनों को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
कर्मचारियों के लिए नई ट्रांसफर पॉलिसी (MOTP-2026):
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120 अंकों का फॉर्मूला: अब कर्मचारियों के तबादलों के लिए 120 अंकों का कंपोजिट स्कोरिंग फ्रेमवर्क लागू होगा।
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वेटेज: तबादला प्रक्रिया में आयु और कैडर अनुभव को 25-25 प्रतिशत, जबकि अन्य मानकों को 50 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा।
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पार्टनर केस में राहत: पति-पत्नी (Spouse) के मामलों में मेरिट अंक 5 से बढ़ाकर 10 कर दिए गए हैं। इसके साथ ही ‘टीचर्स ट्रांसफर पॉलिसी-2026’ को भी हरी झंडी मिल गई है।
वाहन मालिकों के लिए ‘नया सफर योजना’ (टैक्स में बड़ी छूट):
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100% टैक्स छूट: NCR जिलों में BS-4 या उससे पुराने ट्रक और बसों को बदलकर नए BS-6, इलेक्ट्रिक (EV) या CNG वाहन खरीदने पर मोटर वाहन कर (Motor Vehicle Tax) में 100% की छूट मिलेगी।
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50% टैक्स छूट: यदि कोई पुराना या प्रयुक्त (Used) इलेक्ट्रिक और CNG वाहन खरीदता है, तो उसे 50% कर छूट दी जाएगी।
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अन्य लाभ: इस योजना के तहत खरीदे गए वाहनों की रजिस्ट्रेशन फीस भी पूरी तरह माफ होगी और यह लाभ आगामी 10 वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
शहरी विकास और अन्य महत्वपूर्ण निर्णय:
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अवैध कॉलोनियों का समाधान: यमुनानगर नगर निगम क्षेत्र में 26 सितंबर 2013 से पहले विकसित हुई कॉलोनियों की पहचान और सीमाओं के निर्धारण के लिए एक विशेष समिति गठित की जाएगी।
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महिला आयोग में बदलाव: हरियाणा राज्य महिला आयोग (संशोधन) अध्यादेश-2026 के तहत आयोग में गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या 5 से बढ़ाकर 7 कर दी गई है।
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लाइसेंस प्रक्रिया हुई आसान: स्लॉटर हाउस और मीट दुकानों के लिए अलग से व्यापार लाइसेंस लेने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे दोहरी लाइसेंस व्यवस्था खत्म होगी।
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बागवानी और दयालु योजना: ‘हरियाणा बागवानी नर्सरी नियम-2026’ के तहत नर्सरियों के लिए QR कोड आधारित ट्रेसबिलिटी व्यवस्था लागू होगी। वहीं, ‘दयालु-1 योजना’ के तहत क्लेम करने की समय सीमा को 3 महीने से बढ़ाकर 6 महीने कर दिया गया है।