यमुनानगर: राजमिस्त्री के दस्तावेज चुराकर खोल दी फर्जी फर्म; जीएसटी विभाग का नोटिस देख उड़े होश

Haryana

रादौर / यमुनानगर: पहचान दस्तावेजों (आईडी प्रूफ) के दुरुपयोग और धोखाधड़ी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रादौर के रहने वाले एक सीधे-साधे राजमिस्त्री को उस समय अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा झटका लगा, जब उसके घर सीधे जीएसटी (GST) विभाग का नोटिस पहुँच गया। नोटिस में उसे टैक्स चोरी से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए तलब किया गया था। जब पीड़ित ने इसकी पड़ताल करवाई, तो जो सच सामने आया उसने उसके होश उड़ा दिए।

लोन के नाम पर लिए थे दस्तावेज, बना दी फर्जी कंपनी
धोखाधड़ी के शिकार पीड़ित सुभाष चंद ने बताया कि वह राजमिस्त्री का काम करके किसी तरह अपने परिवार का पेट पालता है। कुछ समय पहले उसने एक ग्रुप लोन (समूह ऋण) लेने के लिए अपने पहचान दस्तावेज जैसे पैन कार्ड, आधार कार्ड आदि जमा करवाए थे। लोन की पूरी रकम वह समय पर चुका भी चुका था। लेकिन उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि लोन के नाम पर लिए गए उसके इन गोपनीय दस्तावेजों का इस्तेमाल किसी ने उसके नाम पर एक फर्जी फर्म (कंपनी) का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कर लिया है।

अनपढ़ होने का उठाया फायदा, करोड़ों का हुआ लेनदेन!
सुभाष चंद के अनुसार वह पूरी तरह अनपढ़ है और उसे जीएसटी या टैक्स संबंधी कागजी कार्यवाहियों की कोई समझ नहीं है। घर पर नोटिस आने के बाद जब उसने दूसरे लोगों को यह कागजात दिखाए, तब जाकर धोखाधड़ी का पर्दाफाश हुआ। जांच में पता चला कि जालसाजों ने न सिर्फ उसके नाम पर फर्म खड़ी की, बल्कि उसके जरिए बड़े पैमाने पर व्यापारिक और वित्तीय लेनदेन भी किए, जिसकी वजह से विभाग ने उसे नोटिस जारी किया है।

पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार
खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे सुभाष चंद ने कहा, “मेरा किसी भी तरह के व्यापार, कंपनी या जीएसटी संबंधी गतिविधियों से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। मैं रोज मेहनत-मजदूरी करता हूँ।”

पीड़ित ने स्थानीय प्रशासन और जीएसटी विभाग के उच्चाधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष व गहन जांच कराने की मांग की है। उसने अपील की है कि जिन भी दोषियों ने उसके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया है, उन्हें तुरंत ढूंढकर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इस घटना के बाद से पूरे इलाके के लोग हैरान हैं और अपने निजी दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं।

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