चंडीगढ़: पंजाब में ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ महिलाओं के लिए सुरक्षित और समय पर प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने में बड़ी मददगार साबित हो रही है। स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA), पंजाब के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत किए गए कुल मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP/गर्भपात) मामलों में से 57 प्रतिशत मामले गर्भावस्था के शुरुआती आठ सप्ताह के भीतर दर्ज किए गए हैं।
आंकड़ों की ज़ुबानी (अब तक की स्थिति)
| विवरण | आंकड़े |
| कुल दर्ज कैशलेस MTP प्रक्रियाएं | 323 |
| शुरुआती 8 हफ्तों में किए गए मामले | 185 (57%) |
| योजना के तहत आई कुल लागत | 14.86 लाख रुपये |
| पंजाब में सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या | 800 से अधिक |
विशेषज्ञों का मत: डॉक्टरों के अनुसार, गर्भावस्था के शुरुआती चरणों में गर्भपात कराने से चिकित्सकीय प्रक्रियाएं कम जटिल होती हैं और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम भी बेहद कम हो जाते हैं।
योजना का विस्तार: निजी अस्पतालों में भी मुफ्त इलाज
मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार ने महिलाओं की सुविधा के लिए इस योजना का दायरा बढ़ा दिया है। अब महिलाएं सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सूचीबद्ध (empanelled) निजी अस्पतालों में भी बिना कोई पैसा खर्च किए कैशलेस MTP सेवाओं का लाभ उठा सकती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों की जेब पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
स्वास्थ्य मंत्री और डॉक्टरों का क्या कहना है?
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डॉ. बलबीर सिंह (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री):
“सरकारी और निजी अस्पतालों के इस नेटवर्क विस्तार का उद्देश्य इलाज में होने वाली देरी को खत्म करना है। कैशलेस सुविधाएं मिलने से महिलाएं समय पर सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं ले पा रही हैं, जिससे बाद में होने वाली चिकित्सकीय जटिलताओं को रोका जा सकता है।”
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डॉ. रमिता अग्रवाल (सीनियर प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, माता कौशल्या अस्पताल):
“निर्धारित गर्भकाल सीमा के भीतर और डॉक्टरी देखरेख में किया गया गर्भसमापन पूरी तरह से सुरक्षित और प्रभावी होता है।”