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उचाना के फैसले से गिरेगी सैनी सरकार ! सैनी के 4 मंत्रियों पर तलवार लटकी

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे चैनल MSTV India पर, और आज हम बात करने वाले हैं हरियाणा की सियासी उथल-पुथल की। दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा धमाका होने वाला है? 1 सितंबर को एक फैसला आ सकता है जो सीधे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार को गिरा सकता है! हाँ, आपने सही सुना – कांग्रेस के पक्ष में उचाना सीट पर फैसला आने की संभावना है, और ये पूरा खेल बदल सकता है। उचाना के भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री के विरुद्ध पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह ने याचिका दाखिल कर रखी है ।कल्पना कीजिए – 90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में बीजेपी के 18 विधायक ऐसे हैं जिनके चुनाव को उनके दुश्मनों ने हाईकोर्ट में चैलेंज कर रखा है। और इनमें से चार तो मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की कैबिनेट के मंत्री हैं! क्या ये फैसले बीजेपी की नैया डुबो देंगे?चलिए, स्टेप बाय स्टेप समझते हैं।

उचाना सीट का फैसला!

1 सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई है, और अगर ये कांग्रेस के हक में गया, तो सैनी सरकार की कुर्सी हिल सकती है। क्यों? क्योंकि ये सीट बीजेपी के लिए क्रिटिकल है, और एक सीट का जाना चेन रिएक्शन शुरू कर सकता है। दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि हरियाणा में बहुमत का खेल कितना टाइट है? एक-दो सीटें इधर-उधर हुईं, और सरकार अल्पमत में!

सैनी सरकार क्या गिर जाएगी?

अब आते हैं उन 18 बीजेपी विधायकों पर, जिनके चुनाव हाईकोर्ट में फंसे हैं। इनमें से चार मंत्री हैं – सुनिए उनके नाम:

  1. स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव, अटेली सीट से।
  2. शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल, फरीदाबाद से।
  3. शिक्षा मंत्री महिपाल सिंह ढांडा, पानीपत ग्रामीण से।
  4. खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम, पलवल से।

इन सभी पर एक जैसे आरोप हैं – चुनाव के दौरान सत्ता और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग! ईवीएम में गड़बड़ी कराई गई! हाईकोर्ट के अलग-अलग जजों के सामने ये याचिकाएं दाखिल हैं, और विरोधी पार्टियां दावा कर रही हैं कि चुनाव अवैध घोषित होने चाहिए। दोस्तों, सोचिए – अगर इनमें से एक भी मंत्री की सीट गई, तो कैबिनेट में हड़कंप मच जाएगा!

अब सवाल ये है – क्या ये आरोप सच्चे हैं? बीजेपी कहती है कि ये सब विपक्ष की साजिश है, लेकिन कोर्ट क्या कहेगा? अगर 1 सितंबर को उचाना का फैसला कांग्रेस के पक्ष में आया, तो ये सैनी सरकार के लिए डेथ वारंट साबित हो सकता है। हरियाणा में पहले भी ऐसी उथल-पुथल हो चुकी है – याद है 2019 का ड्रामा? क्या इतिहास खुद को दोहराएगा?अगर आपको ये स्टोरी इंटरेस्टिंग लगी, तो लाइक करें, कमेंट में बताएं

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