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जालंधर में नई एक्टिवा में निकला मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट, उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक के हक में सुनाया बड़ा फैसला

जालंधर: जालंधर के उप-भोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक नई होंडा एक्टिवा में खराबी पाए जाने के मामले में ग्राहक के हक में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने पाया कि स्कूटर में ‘मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट’ (निर्माण संबंधी दोष) था।

आयोग ने होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर राघा मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड को संयुक्त रूप से आदेश दिया है कि वे ग्राहक को स्कूटर की पूरी कीमत वापस करें और साथ ही हर्जाना व मुकदमे का खर्च भी अदा करें।

क्या है पूरा मामला?
जालंधर के पृथ्वी नगर निवासी 28 वर्षीय साहिल ने अगस्त 2024 में 76,619 रुपए खर्च कर एक नई एक्टिवा खरीदी थी। लेकिन खरीदने के कुछ ही समय बाद स्कूटर के इंजन में खराबी आने लगी।

साहिल द्वारा दायर शिकायत के मुताबिक, एक्टिवा थोड़ी दूर चलने पर गर्म हो जाती थी और बार-बार बंद हो जाती थी। इस समस्या को लेकर वह कई बार सर्विस सेंटर गए। वहां कथित तौर पर इंजन रिपेयरिंग के साथ गियर बॉक्स और पिस्टन बदलने की बात भी कही गई, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

सर्विस सेंटर से संतुष्ट न होने पर साहिल ने अक्टूबर 2024 में उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की। सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि एक बिल्कुल नए वाहन को बार-बार सर्विस सेंटर ले जाना पड़ा, जो यह साबित करता है कि वाहन में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट था।

आयोग ने अपनी टिप्पणी में कहा कि कंपनी और डीलर की यह जिम्मेदारी है कि वह उपभोक्ता को एक डिफेक्ट-फ्री (दोष-मुक्त) प्रोडक्ट उपलब्ध कराएं। ग्राहक को दोषपूर्ण वाहन देना उपभोक्ता अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।

आयोग ने होंडा कंपनी और डीलर राघा मोटर्स को 45 दिनों के भीतर ग्राहक साहिल को स्कूटर की पूरी कीमत 76,619 रुपए, मानसिक परेशानी के लिए 15,000 रुपए हर्जाना और 8,000 रुपए मुकदमे का खर्च अदा करने का आदेश दिया है। इस तरह कंपनी को ग्राहक को कुल 99,619 रुपए का भुगतान करना होगा।

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