जालंधर। शहर में लंबे समय से प्रस्तावित डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को आखिरकार मंजूरी मिल गई है। करीब 600 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट का टेंडर नगर निगम की वित्त एवं ठेका कमेटी ने पास कर दिया है। अब जल्द ही चयनित कंपनी शहर में कूड़ा उठाने से लेकर उसके प्रसंस्करण तक की जिम्मेदारी संभालेगी।
इस प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम की ओर से दो टेंडर जारी किए गए थे और दोनों ही टेंडर BVG इंडिया लिमिटेड को मिले हैं। प्रोजेक्ट में हुए वित्तीय बदलावों को संशोधित प्रस्ताव के तौर पर नगर निगम हाउस में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसके लिए जल्द हाउस की बैठक बुलाए जाने की संभावना है।
आठ साल के लिए दिया जाएगा ठेका
नगर निगम ने शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को तीन साल के लिए देने की योजना बनाई थी। हालांकि इतने कम समय के लिए कंपनी द्वारा प्लांट लगाने में रुचि नहीं दिखाने के बाद इसकी अवधि बढ़ाकर आठ साल कर दी गई है। इसके बदले निगम कंपनी को हर साल करीब 75 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा।
बुधवार को हुई वित्त एवं ठेका कमेटी की बैठक में सॉलिड वेस्ट प्रोजेक्ट के अलावा करीब 675 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्यों को मंजूरी दी गई। इनमें लगभग 75 करोड़ रुपये के सड़क, पार्क, ट्यूबवेल, जलापूर्ति और सीवरेज से जुड़े काम शामिल हैं।
जीपीएस से होगी कूड़ा उठाने वाले वाहनों की निगरानी
प्रोजेक्ट के तहत घर-घर से कूड़ा उठाने वाले वाहनों में जीपीएस लगाया जाएगा। इसके अलावा वाहनों की निगरानी के लिए मोबाइल एप भी तैयार की जाएगी। इससे नगर निगम के अधिकारी वाहनों की रियल टाइम ट्रैकिंग कर सकेंगे और यह पता लगाया जा सकेगा कि कूड़ा कलेक्शन के लिए वाहन किन इलाकों में पहुंच रहे हैं।
घरों से एकत्रित कूड़े को मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) सेंटर तक पहुंचाया जाएगा। यहां आधुनिक मशीनों की मदद से कचरे को अलग-अलग किया जाएगा। गीले कचरे को खाद बनाने के लिए वरियाणा डंप साइट पर भेजा जाएगा।
वरियाणा में नौ एकड़ जमीन पर बनेगा प्लांट
कूड़े के वैज्ञानिक तरीके से निपटारे के लिए नगर निगम ने वरियाणा डंप साइट के पास करीब नौ एकड़ जमीन खरीदी है। इसी जमीन पर आधुनिक तकनीक से कूड़ा प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जाएगा। यहां गीले कचरे से जैविक खाद तैयार करने की योजना है।
450 वाहन और 1,800 से ज्यादा कर्मचारी होंगे तैनात
प्रोजेक्ट के तहत कंपनी करीब 450 छोटे वाहन डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए लगाएगी। रोजाना लगभग 631 मीट्रिक टन कूड़ा एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना के अनुसार प्रत्येक 700 घरों के लिए एक कूड़ा कलेक्शन वाहन तैनात होगा। प्रत्येक वाहन पर एक ड्राइवर और दो हेल्पर होंगे। कंपनी को इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए 1,800 से अधिक कर्मचारियों की तैनाती करनी होगी।
शहर को मिल सकते हैं कई फायदे
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट लागू होने के बाद शहर में कचरे के उठान और निपटारे की व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। घरों और बाजारों से निकलने वाले कचरे की कलेक्शन, सेग्रीगेशन और प्रोसेसिंग व्यवस्थित तरीके से होगी।
इसके अलावा सड़कों, खाली प्लाटों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा जमा होने की समस्या कम हो सकती है। वरियाणा डंप साइट पर कचरे का दबाव घटने से आग, दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या में भी कमी आने की उम्मीद है। बेहतर कचरा प्रबंधन से शहर की स्वच्छता रैंकिंग में सुधार होने और केंद्र से मिलने वाली ग्रांट में फायदा होने की संभावना है।
कई सड़क और अन्य विकास कार्यों को भी मंजूरी
वित्त एवं ठेका कमेटी ने शहर के विभिन्न हिस्सों में सड़क निर्माण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई कार्यों को भी मंजूरी दी है। इनमें कई वार्डों में कंक्रीट की सड़कें बनाने, कपूरथला रोड पर फुटपाथ और ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने तथा डॉ. बीआर आंबेडकर चौक से निगम सीमा तक सड़क चौड़ी करने के कार्य शामिल हैं।
इसके अलावा बूटा मंडी के आसपास, नार्थ हलके के विभिन्न वार्डों और अन्य क्षेत्रों में सीमेंट-कंक्रीट तथा लुक-बजरी की सड़कों के निर्माण को भी स्वीकृति दी गई है।
यूनियनों ने जताया विरोध, हड़ताल की घोषणा
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद सफाई कर्मचारियों की यूनियनों ने विरोध शुरू कर दिया है। पंजाब सफाई मजदूर फेडरेशन ने वीरवार से हड़ताल पर जाने की घोषणा की है।
यूनियन नेता सन्नी सहोता का कहना है कि प्रोजेक्ट को लेकर प्रशासन ने यूनियनों से पर्याप्त बातचीत नहीं की। उनके मुताबिक कई यूनियनें हड़ताल के समर्थन में हैं। वहीं बंटू सभ्रवाल के नेतृत्व वाली यूनियनों ने भी प्रोजेक्ट का विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो सफाई व्यवस्था ठप करने को लेकर अगली बैठक में फैसला लिया जाएगा।
इस तरह एक ओर नगर निगम शहर की सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सफाई कर्मचारी यूनियनों के विरोध ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।


