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देश का सबसे भव्य शहीद स्मारक तैयार: अंबाला में ₹700 करोड़ की लागत से बना ‘क्रांति का नया गवाह’, सीएम सैनी ने किया निरीक्षण

चंडीगढ़/अंबाला: हरियाणा के अंबाला छावनी में बन रहा देश का सबसे भव्य और एशिया का सबसे बड़ा शहीद स्मारक अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। लगभग 700 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से 22 एकड़ क्षेत्र में तैयार यह ऐतिहासिक स्मारक जल्द ही राष्ट्र को समर्पित किया जा सकता है। बुधवार देर शाम मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ऊर्जा एवं परिवहन मंत्री अनिल विज के साथ निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया, जिसके बाद इसके शीघ्र लोकार्पण की चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं।

1857 की क्रांति के अनसुने नायकों को सम्मान

यह भव्य स्मारक 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों की याद में बनाया गया है। यहाँ स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, संघर्ष और क्रांति की गाथा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से संजोया गया है। परिसर में:

  • दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेज और टेलीग्राम संरक्षित किए गए हैं।

  • उस दौर की युद्ध सामग्री और क्रांतिकारियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदर्शित की गई हैं।

  • शहीदी वॉल पर लगभग 700 वीर शहीदों के नाम अंकित किए जा रहे हैं।

मंत्री अनिल विज का 30 साल पुराना सपना हुआ साकार

इस महा-परियोजना को कैबिनेट मंत्री अनिल विज का ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ माना जाता है। तीन दशक (30 साल) से अधिक समय के उनके निरंतर प्रयासों के बाद यह स्मारक आज धरातल पर उतर सका है। निरीक्षण के दौरान विज ने मुख्यमंत्री को बताया कि यहाँ ऐसे पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि 1857 के विद्रोह की पहली चिंगारी मेरठ से भी पहले अंबाला छावनी में भड़की थी।

स्मारक की मुख्य विशेषताएं और आधुनिक सुविधाएं

इस ऐतिहासिक धरोहर को बेहद आधुनिक और इंटरैक्टिव बनाया गया है:

  • 22 डिजिटल गैलरियां: स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण अध्यायों को ऑडियो-विजुअल और डिजिटल तकनीक के जरिए जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।

  • 150 फीट ऊंचा मेमोरियल टॉवर: यह स्मारक का मुख्य आकर्षण होगा, जिसमें हाई-स्पीड लिफ्ट, एक शानदार आर्ट गैलरी और आधुनिक लाइटिंग सिस्टम लगाया गया है, जो रात में दूर से ही चमकेगा।

  • शोध और पर्यटन का केंद्र: परिसर में दो मंजिला संग्रहालय (Museum), ई-लाइब्रेरी, अत्याधुनिक ऑडिटोरियम, प्रदर्शनी हॉल, ओपन एयर थिएटर, फूड कोर्ट और एक रिसर्च सेंटर विकसित किया गया है।

नेतृत्व का संदेश: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह स्मारक केवल एक इमारत नहीं, बल्कि हमारी भावी पीढ़ियों के लिए देशभक्ति और सर्वोच्च बलिदान की अमर प्रेरणा है। वहीं अनिल विज ने जोर देकर कहा कि यह धरोहर देश को स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक इतिहास से परिचित कराएगी।

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