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पद्म पुरस्कार 2026: पंजाब की 3 बड़ी हस्तियों को मिला पद्मश्री; डेरा बल्लां प्रमुख के सम्मान से बदलेंगे सियासी समीकरण

जालंधर: पद्म पुरस्कार विजेताओं के लिए राष्ट्रपति भवन में मंगलवार को ‘अवॉर्ड वितरण समारोह’ का दूसरा सेशन आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वर्ष 2026 के पद्म विजेताओं को सम्मानित किया। इस भव्य समारोह में पंजाब और चंडीगढ़ की चार प्रमुख हस्तियों को ‘पद्मश्री’ से नवाजा गया, जिनमें खेल, समाज सेवा और अध्यात्म जगत के बड़े नाम शामिल हैं।

पंजाब और चंडीगढ़ के इन नायकों को मिला सम्मान:

  • संत निरंजन दास जी: प्रमुख, डेरा सचखंड बल्लां (अध्यात्म और समाज सेवा)

  • हरमनप्रीत कौर: कप्तान, भारतीय महिला क्रिकेट टीम (खेल)

  • बलदेव सिंह: भारतीय हॉकी के दिग्गज और प्रसिद्ध द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच (खेल)

  • इंदरजीत सिंह सिद्धू: चंडीगढ़ के रहने वाले 88 वर्षीय पूर्व आईपीएस अधिकारी (स्वच्छता अभियान और समाज सेवा)

संत निरंजन दास को पद्मश्री: पंजाब की राजनीति और दोआबा पर क्या होगा असर?

जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख संत निरंजन दास जी को पद्मश्री सम्मान मिलना केवल एक धार्मिक या सामाजिक उपलब्धि नहीं है। राजनीतिक गलियारों में इसे पंजाब, खासकर दोआबा क्षेत्र के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों में एक बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

1. रविदासिया समाज का बढ़ा गौरव

संत निरंजन दास जी को यह सम्मान उनके द्वारा अध्यात्म, मानव कल्याण, समानता और समाज में भाईचारे को मजबूत करने के लिए दिए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए मिला है। इस सम्मान से पूरे रविदासिया समाज में खुशी की लहर है और उनका मनोबल बढ़ा है।

2. भाजपा की दलित वोट बैंक पर नजर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम के जरिए भाजपा पंजाब के बड़े दलित वोट बैंक में अपनी मजबूत पैठ बनाने की कोशिश कर रही है।

  • देश में सबसे अधिक हिस्सेदारी: पंजाब की करीब 32 प्रतिशत आबादी दलित समुदाय से संबंधित है, जो देश के किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है।

  • दोआबा क्षेत्र का महत्व: खासकर दोआबा क्षेत्र में अनुसूचित जाति (SC) की आबादी लगभग 45 प्रतिशत है, जहाँ डेरा बल्लां का गहरा धार्मिक और सामाजिक प्रभाव है।

3. पीएम मोदी के दौरों का सियासी संदेश

इसी वर्ष गुरु रविदास जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद डेरा सचखंड बल्लां पहुंचे थे। विशेषज्ञों के अनुसार, पीएम का वहां जाना केवल धार्मिक श्रद्धा तक सीमित नहीं था, बल्कि यह केंद्र सरकार द्वारा इस समाज के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने का एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी था।

मानवता की सेवा को मिला सम्मान

संत निरंजन दास जी ने अपना पूरा जीवन सेवा, समानता और मानवता के मूल्यों के लिए समर्पित किया है। उनका मार्गदर्शन समाज में सकारात्मक सोच और आपसी सद्भाव को निरंतर मजबूत कर रहा है। पंजाब सहित पूरे देश में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने के लिए उनके प्रयास हमेशा स्मरणीय रहेंगे। पूरा समाज ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्रार्थना कर रहा है ताकि मानवता की सेवा का यह प्रकाश लगातार फैलता रहे।

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