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मौत के मुंह से लौटी ‘नन्ही परी’: बठिंडा के डॉक्टरों ने 17 दिनों की जंग के बाद समय से पहले जन्मी बच्ची को बचाया

बठिंडा/रामपुरा फूल: रामपुरा फूल के अग्रवाल अस्पताल में हाल ही में एक चमत्कार देखने को मिला। रेशम सिंह और गुरमेल कौर के घर एक बेटी ने जन्म तो लिया, लेकिन वह समय से काफी पहले (महज 33 सप्ताह में) पैदा हो गई थी। जन्म के वक्त उसका वजन केवल 1.926 किलोग्राम था और उसके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हुए थे, जिससे उसे सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही थी। बठिंडा और होशियारपुर से आई ये दो कहानियाँ पंजाब की स्वास्थ्य व्यवस्था और ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ की सफलता की एक भावुक तस्वीर पेश करती हैं। जहाँ एक नन्ही जान ने मौत को मात दी, वहीं सरकारी योजना ने एक गरीब परिवार को आर्थिक तबाही से बचा लिया।

डॉक्टरों की टीम और 17 दिनों का संघर्ष

24 वर्षों का अनुभव रखने वाले शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरिंदर अग्रवाल ने बिना समय गंवाए बच्ची को NICU (नर्सरी) में भर्ती किया।

  • सांसों की डोर: बच्ची को 10 दिनों तक CPAP मशीन और फिर 4 दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया।

  • पीलिया और देखभाल: इलाज के दौरान उसे पीलिया भी हुआ, जिसे फोटोथेरेपी से ठीक किया गया। साथ ही, ‘कंगारू मदर केयर’ के जरिए उसे प्राकृतिक गर्माहट दी गई।

  • सफलता: 17 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद, बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसका वजन बढ़कर 2.106 किलोग्राम हो गया है।

“बच्चे को बचाना सिर्फ इलाज पर नहीं, बल्कि सही समय पर लिए गए निर्णय पर निर्भर करता है। थोड़ी-सी देरी भी जानलेवा हो सकती थी।” — डॉ. सुरिंदर अग्रवाल

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना: वरदान बनी ‘कैशलेस’ सुविधा

इस पूरे संघर्ष में परिवार के लिए सबसे बड़ी राहत पंजाब सरकार की ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ रही।

  1. मुफ्त इलाज: बच्ची के 17 दिनों के महंगे इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया गया, जिससे परिवार पर एक पैसे का भी बोझ नहीं पड़ा।

  2. होशियारपुर का उदाहरण: इसी तरह, होशियारपुर के मनिंदर सिंह की बेटी गुरकीरत कौर का इलाज भी इसी योजना के तहत हुआ। मनिंदर ने बताया कि उनके कार्ड पर 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है, जो गरीब परिवारों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।

उम्मीद की नई धड़कन

मनिंदर सिंह भावुक होकर कहते हैं, “जो व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष करता है, वह इतने महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकता। यह योजना हम जैसे लोगों के लिए बहुत बड़ी बात है।”

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