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यमुनानगर में ₹50 करोड़ के कथित माइनिंग घोटाले की जांच तेज, रिटायर्ड जज की टीम ने खंगाले रिकॉर्ड

HARYANA DESK : जिले में कथित बोगस माइनिंग परचेज और फर्जी बिलिंग से जुड़े मामले की जांच अब तेज हो गई है। ₹50 करोड़ से अधिक के कथित घोटाले को लेकर मिली शिकायत के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज एच.एस. मदान की अगुवाई में गठित विशेष टीम यमुनानगर पहुंची। टीम ने संबंधित कार्यालय में करीब चार घंटे से अधिक समय तक रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच की। इस दौरान माइनिंग खरीद, बिलिंग और अन्य लेनदेन से जुड़े कई दस्तावेजों को टीम द्वारा अपने कब्जे में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।

फर्जी फर्म बनाकर खरीद दिखाने का आरोप

मामले की शिकायत संजीव चौधरी की ओर से की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एम.एस. गणेश इंटरप्राइजेज और रॉक बॉटम के नाम से फर्में तैयार की गईं और इनके जरिए कागजों में माइनिंग सामग्री की कथित खरीद दिखाई गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रिकॉर्ड में खरीद दर्शाने के बाद इसी आधार पर बड़े स्तर पर बिलिंग की गई। अब जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि दस्तावेजों में दर्ज खरीद वास्तव में हुई थी या केवल कागजी लेनदेन के जरिए बिल तैयार किए गए।

चार घंटे से ज्यादा रिकॉर्ड की जांच

रिटायर्ड जज एच.एस. मदान के नेतृत्व वाली टीम ने कार्यालय में मौजूद परचेज रिकॉर्ड, बिलिंग दस्तावेज और अन्य संबंधित कागजात की जांच की। जांच के दौरान कथित बोगस खरीद और बिलिंग से जुड़े दस्तावेज भी कब्जे में लिए गए। अब इन रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद मामले की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि रिकॉर्ड में दर्ज खरीद, बिक्री और भुगतान का वास्तविक कारोबार से कोई संबंध है या नहीं।

आदर्शपाल पर भी लगाए गए आरोप

शिकायतकर्ता संजीव चौधरी ने मामले में इलाके के नेता आदर्शपाल पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि कथित फर्जी फर्मों और बोगस माइनिंग खरीद के पीछे आदर्शपाल की कथित शह और संरक्षण रहा। हालांकि, आदर्शपाल ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से उनके खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने अपने किसी सत्ताधारी राजनीतिक दल या ऐसे राजनीतिक व्यक्ति से संबंध होने से भी इनकार किया है, जो जांच को प्रभावित कर सके।

ई-रवाना रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में

मामले में ई-रवाना और कमर्शियल बिलिंग रिकॉर्ड की जांच भी अहम मानी जा रही है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि कागजों में दर्ज माइनिंग सामग्री की खरीद-बिक्री का वास्तविक परिवहन रिकॉर्ड से कितना मेल है। ई-रवाना में दर्ज जानकारी और कमर्शियल बिलों के बीच किसी तरह की विसंगति मिलने पर मामले की जांच आगे बढ़ सकती है।

दस्तावेजों की जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच टीम द्वारा कब्जे में लिए गए दस्तावेजों और रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित माइनिंग खरीद और बिलिंग में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला माइनिंग रिकॉर्ड, फर्जी बिलिंग और कथित कागजी लेनदेन में बड़े स्तर पर हेरफेर से जुड़ा हो सकता है। फिलहाल जांच जारी है और आगे की तस्वीर दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

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