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‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अब स्कूलों में: मान सरकार का बड़ा फैसला; 6,000 प्रिंसिपलों को दी जा रही मानसिक स्वास्थ्य और नशा रोकथाम की ट्रेनिंग

 चंडीगढ़ : ऐसे समय में जब देश के अधिकांश हिस्सों में नशे के संकट पर चर्चा हो रही है, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने एक और साहसिक तथा अग्रणी निर्णय लिया है। नशे की अभिशाप को जड़ से समाप्त करने के लिए राज्य सरकार द्वारा स्कूल स्तर पर रोज़ाना युवा विद्यार्थियों के मन को सशक्त बनाकर उन्हें इस अभिशाप से दूर रखा जा रहा है, क्योंकि नशे को वास्तव में इसी स्तर पर ही रोका जा सकता है।

पंजाब सरकार की प्रमुख मुहिम ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ के तहत बड़े स्तर पर योजनाबद्ध क्षमता-निर्माण कार्यक्रम स्कूल स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों और नशे के उपयोग से जुड़े जोखिमों के बारे में युवा मनों को सकारात्मकता की ओर मोड़ रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग तथा डॉ. बी. आर. अंबेडकर स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (ए.आई.एम.एस.), मोहाली के माध्यम से भगवंत सिंह मान सरकार ने राज्य भर के स्कूल प्रमुखों के लिए संरचित प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यशालाएं शुरू की हैं, क्योंकि सरकार का मानना है कि नशे की रोकथाम इसकी लत लगने से बहुत पहले शुरू की जानी चाहिए।

यह पहल इस समझ पर आधारित है कि मानसिक स्वास्थ्य कोई बाहरी विषय नहीं है, बल्कि बच्चे के भावनात्मक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास की नींव है। अब तक के प्रमाणों से पता चलता है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी लगभग आधी समस्याएं 14 वर्ष की आयु से पहले उभरने लगती हैं। इसी कारण पंजाब सरकार ने स्कूलों को सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में स्वीकार किया है। राज्य भर के युवाओं में चिंता, शैक्षणिक दबाव, गुस्सा, दूसरों द्वारा परेशान किया जाना तथा कम उम्र में नशीले पदार्थों के उपयोग जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। इन संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय मान सरकार ने विलंबित प्रतिक्रिया की जगह प्रारंभिक हस्तक्षेप को प्राथमिकता दी है।

यह कार्यक्रम स्कूल प्रिंसिपलों को इस परिवर्तन के केंद्र में रखता है। स्कूल प्रमुख संस्थागत संस्कृति को आकार देते हैं, शिक्षकों का मार्गदर्शन करते हैं और जब विद्यार्थियों में निराशा के लक्षण दिखाई देते हैं तो सबसे पहले प्रतिक्रिया करते हैं। फिर भी पिछले कई दशकों से भारत भर में स्कूल नेतृत्व मानसिक स्वास्थ्य ढांचे या नशे के उपयोग से संबंधित रोकथाम रणनीतियों के बारे में सीमित जानकारी के साथ काम कर रहा है। पंजाब इस अंतर को निर्णायक रूप से भर रहा है। नशे के उपयोग की पहचान, रेफरल मार्ग अपनाने और स्वस्थ वातावरण सृजित करने के लिए प्रिंसिपलों को व्यावहारिक साधनों से लैस कर राज्य सरकार स्कूलों को मूक दर्शक बनने के बजाय सहायता प्रदान करने वाले सुरक्षित स्थानों में परिवर्तित कर रही है।

यह विशेष पहल राज्य सरकार के गंभीर प्रयासों को उजागर करती है। ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ के दूसरे चरण में 6,000 से अधिक स्कूलों के प्रिंसिपलों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें पंजाब के सभी 23 जिलों के लगभग 4,000 वरिष्ठ माध्यमिक और हाई स्कूलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पहले चरण में 7 से 9 जनवरी 2026 के बीच आयोजित कार्यशालाओं में 9 जिलों के 1,463 स्कूल प्रमुख शामिल हुए। इस दौरान विशेष रूप से सीमावर्ती जिलों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो नशों के विरुद्ध हमारी लड़ाई में अग्रिम पंक्ति में खड़े हैं। ये सत्र डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, मोहाली द्वारा आयोजित किए गए। कार्यशालाओं का संचालन करने वाले विशेषज्ञों को प्रशिक्षण टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ (टी.आई.एस.एस.), मुंबई के एक फील्ड-एक्शन प्रोजेक्ट ‘स्कूल इनिशिएटिव फॉर मेंटल हेल्थ एडवोकेसी’ के विशेषज्ञों द्वारा एक संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से दिया गया।

उल्लेखनीय है कि यह पहल केवल कागजी या दिखावटी नहीं है, बल्कि यह पंजाब की तकनीकी रीढ़—डेटा इंटेलिजेंस और तकनीकी सहायता इकाई (डीआईटीएसयू), पंजाब—के डेटा द्वारा समर्थित है, जो नशीले पदार्थों के सेवन के विरुद्ध एक व्यापक कार्रवाई का नेतृत्व कर रही है। इसे नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन (एनएपीडीडीआर) के तहत स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा नियुक्त जिला नोडल अधिकारियों की निगरानी और समन्वय के साथ संचालित किया जा रहा है। यह संस्थागत ढांचा एनएपीडीडीआर के अंतर्गत सुनिश्चित फंडिंग, स्पष्ट जवाबदेही और जिला-स्तरीय समन्वय सुनिश्चित करते हुए इस अभियान को डेटा-संचालित, परिणामोन्मुख और ठोस प्रभाव की दिशा में अग्रसर करता है।

मोहाली के प्रशिक्षण केंद्र में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की उपस्थिति इस दिशा में सरकार की गंभीरता को दर्शाती है। इसके साथ ही यह शासन के ऐसे मॉडल को भी रेखांकित करता है, जो मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा और नशीले पदार्थों की रोकथाम जैसी चुनौतियों—जिनके लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता होती है—को आपस में जोड़कर देखता है।

पंजाब, कई अन्य राज्यों की तरह, नशों और नशीले पदार्थों के सेवन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है और यह एक ऐसा मुद्दा है जो सभी के लिए समान चिंता का विषय है। भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार इसी विमर्श को बदलने में जुटी हुई है और पंजाब राज्य स्कूल नेतृत्व में निवेश कर, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को दूर कर तथा जमीनी स्तर पर सक्रिय संस्थाओं का गठन कर वास्तविक रोकथाम आधारित शासन की मिसाल कायम कर रहा है। यह केवल नशों के विरुद्ध एक अभियान नहीं है, बल्कि यह बच्चों, स्कूलों और राज्य के भविष्य में एक दीर्घकालिक निवेश है, जो अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल स्थापित कर रहा है।

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