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राव इंद्रजीत सिंह बनाम राव नरबीर सिंह!

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे चैनल MSTV India पर, जहां हम राजनीति के सबसे गर्म मुद्दों को आपके सामने परोसते हैं। दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही समाज के दो शेर कैसे बन जाते हैं एक-दूसरे के दुश्मन? आज की ये स्टोरी है हरियाणा की राजनीति की सबसे हॉट और स्पाइसी जंग की – राव इंद्रजीत सिंह बनाम राव नरबीर सिंह! राव इंद्रजीत सिंह – गुरुग्राम के एमपी, केंद्रीय मंत्री, राव तुलाराम के वंशज और पूर्व सीएम राव बीरेंद्र सिंह के बेटे। ये वो शख्स हैं जिन्होंने कांग्रेस से बीजेपी तक का सफर तय किया और साउथ हरियाणा में बीजेपी का किला मजबूत किया। और दूसरी तरफ राव नरबीर सिंह – बादशाहपुर के पूर्व विधायक, कैबिनेट मंत्री, जो मात्र 26 साल की उम्र में गृह राज्यमंत्री बन गए थे। दोनों ही अहीर समाज के लीडर, दोनों ही राजनीति के दिग्गज, लेकिन इनकी दुश्मनी ऐसी कि पार्टी एक होने के बावजूद एक-दूसरे को देखना तक पसंद नहीं! अहीरवाल की धरती पर जहां दोनों ही अहीर समाज के बड़े नाम हैं, वहां ये दुश्मनी कैसे पनपी? क्या ये सिर्फ सत्ता की लड़ाई है या कुछ पर्सनल?

ये दुश्मनी शुरू कहां से हुई 

 दोस्तों, रूट्स में जाओ तो ये स्टोरी 1987 की है! जी हां, उस साल जटूसाना विधानसभा सीट पर चुनाव हुआ। राव इंद्रजीत सिंह, जो तब कांग्रेस के उम्मीदवार थे, वो राव परिवार की इज्जत दांव पर लगाकर मैदान में थे। लेकिन सामने थे राव नरबीर सिंह, लोकदल के टिकट पर! और क्या हुआ? नरबीर ने इंद्रजीत को धूल चटा दी! वो हार इतनी जोरदार थी कि पूरे हरियाणा में चर्चा हुई। इंद्रजीत जैसे रॉयल फैमिली के वारिस को हराना कोई छोटी बात नहीं थी। नरबीर के पिता राव महाबीर सिंह भी तीन बार विधायक रहे थे, लेकिन ये जीत ने नरबीर को स्टार बना दिया। चौधरी देवीलाल ने उन्हें मंत्री बनाया, और बस यहीं से शुरू हुई वो रंजिश जो आज तक थम नहीं रही!

फिर क्या, दोनों का सफर अलग-अलग चला। इंद्रजीत ने कांग्रेस में रहकर कई बार एमपी बने, रेवाड़ी से लोकसभा जीती। नरबीर ने 1996 में सोहना से जीत हासिल की, बंसीलाल सरकार में मंत्री बने। लेकिन असली मसाला तब आया जब दोनों बीजेपी में आ गए!

बीजेपी में वजूद की जंग

 2014 में इंद्रजीत कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए, और नरबीर पहले से ही बीजेपी में थे। पार्टी एक, लेकिन दिल अलग! अहीरवाल बेल्ट में दोनों की जंग चरम पर पहुंच गई। इंद्रजीत साउथ हरियाणा में बीजेपी को मजबूत कर रहे थे, लेकिन नरबीर को लगता था कि इंद्रजीत उनकी ग्राउंड छीन रहे हैं।2019 लोकसभा इलेक्शन में तो हद हो गई! इंद्रजीत ने आरोप लगाया कि नरबीर ने उनके खिलाफ कैंपेन किया।

अब आते हैं रिसेंट ट्विस्ट्स पर! 2024 हरियाणा असेंबली इलेक्शन में दोनों फिर आमने-सामने। इंद्रजीत ने सीएम पोस्ट के लिए दावा ठोका, लेकिन नरबीर ने कहा – मैं रेस में नहीं हूं। लेकिन बैकस्टेज क्या चल रहा था? नरबीर खट्टर कैंप के माने जाते हैं, और इंद्रजीत ने खट्टर पर आरोप लगाए कि वो अहीरवाल को डिवाइड करने की कोशिश कर रहे हैं।

बीजेपी के ख़िलाफ़ उतारा उम्मीदवार

मानेसर म्युनिसिपल इलेक्शन में तो कमाल हो गया! इंद्रजीत के लॉयलिस्ट इंदरजीत यादव ने इंडिपेंडेंट लड़कर बीजेपी कैंडिडेट को हरा दिया। मेयर बनने के बाद इंदरजीत यादव ने पंचायत में फूट-फूटकर रोते हुए नरबीर पर आरोप लगाए कि वो उन्हें परेशान कर रहे हैं। नरबीर ने जवाब में कहा कि क्रिमिनल्स को पार्टी में नहीं लेना चाहिए! और हाल ही में इंद्रजीत की बेटी आरती राव सिंह को कैबिनेट में जगह मिली, जबकि नरबीर भी मंत्री बने। लेकिन अंदरखाने दुश्मनी जारी है – डिनर डिप्लोमेसी से लेकर पॉलिटिकल मीटिंग्स तक, दोनों एक-दूसरे को नीचा दिखाने का मौका नहीं छोड़ते!

दोस्तों, ये दुश्मनी सिर्फ दो लोगों की नहीं, बल्कि अहीर समाज और हरियाणा पॉलिटिक्स की डायनामिक्स बदल रही है। एक तरफ इंद्रजीत का रॉयल बैकग्राउंड और सेंट्रल इन्फ्लुएंस, दूसरी तरफ नरबीर का ग्रासरूट कनेक्शन। लेकिन सवाल ये है – क्या ये जंग कभी खत्म होगी? या अहीरवाल में बीजेपी की नैया डुबो देगी? आप क्या सोचते हैं? कमेंट्स में बताओ – टीम इंद्रजीत या टीम नरबीर?

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