चंडीगढ़: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। हुड्डा ने सरकार के इस कदम पर तंज कसते हुए कहा, “देर आए, दुरुस्त आए।” उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर बीजेपी सरकार समय रहते यह निर्णय ले लेती, तो देश के लाखों युवाओं का भविष्य और मेहनत पेपर लीक की भेंट न चढ़ती।
‘केवल कानून काफी नहीं, कड़ा क्रियान्वयन जरूरी’
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक के मामलों से युवाओं का पूरी भर्ती प्रणाली से विश्वास उठ चुका है। अब पूरे सिस्टम को नए सिरे से पारदर्शी बनाने की जरूरत है, ताकि केवल काबिलियत के आधार पर ही युवाओं का चयन हो सके।
संसद में होने वाली आगामी चर्चा पर हुड्डा ने उम्मीद जताई कि इस मुद्दे पर कोई ठोस समाधान निकलेगा। हालांकि, उन्होंने सवाल भी उठाया कि पेपर लीक रोधी कानून बनने के बावजूद आज तक कितने दोषियों को सजा मिल सकी है? उन्होंने मांग की कि केवल कानून बनाना काफी नहीं है, बल्कि दोषियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का अंत जरूरी
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सालों तक दिन-रात मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के लिए पेपर लीक किसी मानसिक आघात से कम नहीं होता। जब सालों की मेहनत पल भर में पानी हो जाती है, तो व्यवस्था के प्रति निराशा पैदा होती है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को विपक्ष युवाओं के आंदोलन की बड़ी जीत बता रहा है। हुड्डा ने साफ शब्दों में कहा कि अब सरकार की असली चुनौती केवल बयानबाजी तक सीमित न रहकर भर्ती व्यवस्था में पारदर्शी सुधार लागू करने की है।


