Dharam Desk: शाबर मंत्र ग्रामीण और जन-भाषा में रचित वे शक्तिशाली मंत्र हैं, जिन्हें तंत्र और जन-साधारण की परंपरा में अत्यंत प्रभावी माना जाता है। शास्त्रीय मंत्रों की तुलना में शाबर मंत्रों की भाषा सरल (अक्सर अवधी, देहाती या हिंदी की बोलियों में) होती है, लेकिन इनकी शक्ति तुरंत फल देने वाली मानी जाती है।
शाबर मंत्रों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनके रचयिता गुरु गोरखनाथ और नवनाथ सिद्ध माने जाते हैं। इन मंत्रों में अक्सर इष्ट देव (यहाँ हनुमान जी) को भगवान श्री राम की आन (दहाई/सोगंद) दी जाती है, जिससे यह मंत्र तुरंत कार्य करता है।
1. संकट नाश और रक्षा हेतु शाबर मंत्र
“ॐ गुरु जी! हनुमान पहलवान, वर्ष बारह का जवान।
हाथ में लंगोट, मुख में पान।
आओ आओ बाबा हनुमान!
न आओ तो रामचन्द्र की आन।
मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति।
फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।”
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महत्व: यह मंत्र किसी भी प्रकार के अचानक आए संकट, भय या अनहोनी से रक्षा के लिए जपा जाता है।
2. नकारात्मक ऊर्जा और भूत-प्रेत बाधा निवारण मंत्र
“हनुमान हठीले, गदा के मारे।
लंका जारे, अंसार पछाड़े।
भूत-प्रेत, डाकिनी-शाकिनी को मार भगावे।
जो कोई आवे, तो भस्म कर जावे।
शब्द सांचा, पिण्ड कांचा।
फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।”
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महत्व: यदि किसी व्यक्ति को नज़र दोष, भूत-प्रेत या किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का अहसास हो, तो इस मंत्र के जाप से राहत मिलती है।
जाप विधि और सावधानियां
शाबर मंत्र बहुत तीव्र और प्रभावकारी होते हैं, इसलिए इनके नियम और स्वच्छता का पालन करना बेहद जरूरी है:
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पवित्रता: शाबर मंत्रों की साधना के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य, मानसिक शुद्धता और सात्विक आहार (लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा का पूरी तरह त्याग) आवश्यक है।
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शुभ दिन: इन मंत्रों की शुरुआत मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती या दीपावली/होली की रात से की जाती है।
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जाप संख्या: किसी भी शाबर मंत्र को सिद्ध करने के लिए मंगलवार या शनिवार के दिन 108 बार जाप (1 माला) करना शुभ माना जाता है।
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सामग्री: हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं, लाल वस्त्र पहनें और लाल आसन पर बैठें। उन्हें बूंदी या गुड़-चने का भोग लगाएं।
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सावधानी: शाबर मंत्रों का प्रयोग कभी भी किसी का अहित या बुरा करने के लिए नहीं करना चाहिए। इसका दुरुपयोग करने पर स्वयं का नुकसान हो सकता है।
विशेष नोट: शाबर मंत्रों को सिद्ध करने या विशेष समस्याओं में इस्तेमाल करने से पहले किसी योग्य गुरु या विशेषज्ञ का मार्गदर्शन लेना हमेशा श्रेष्ठ रहता है।


