चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने राज्य के शहरी निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका) में संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और न्यायसंगत बनाने के लिए नई प्रणाली को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया।
नई व्यवस्था वर्ष 2013 की पुरानी अधिसूचनाओं की जगह लेगी। इसके तहत अब राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों में एक समान, ‘सूत्र-आधारित’ (Formula-based) मूल्यांकन प्रणाली लागू होगी, जिससे अधिकारियों का विवेकाधिकार खत्म होगा और कर विवादों में कमी आएगी।
कैसा होगा नया कर निर्धारण सूत्र?
अब संपत्ति कर का आकलन किसी मनमाने तरीके से नहीं, बल्कि एक स्पष्ट फॉर्मूले से होगा। इसमें प्लॉट क्षेत्र या कारपेट एरिया, संबंधित कलेक्टर रेट और फ्लोर फैक्टर के आधार पर पूंजीगत मूल्य तय किया जाएगा। इसके अलावा, कर का अचानक बोझ न पड़े, इसके लिए नई व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
शहरों का 4 श्रेणियों में विभाजन
नई नीति के तहत राज्य के सभी शहरों को उनकी आबादी और निकाय प्रकार के अनुसार चार श्रेणियों में बांटा गया है:
-
नगर निगम: ए-1 और ए-2 श्रेणी।
-
नगर परिषद व नगर पालिका: बी और सी श्रेणी।
-
प्रत्येक श्रेणी के लिए न्यूनतम और अधिकतम कर दरें (Tax Slabs) तय की जाएंगी, जिससे निकाय अपनी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से दरें चुन सकेंगे। आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और संस्थागत संपत्तियों पर उनके उपयोग के अनुसार अलग-अलग दर लागू होगी।
इन संपत्तियों को मिलेगी 100% टैक्स छूट
सरकार ने कई सामाजिक और धार्मिक श्रेणियों को पूरी तरह से संपत्ति कर से मुक्त रखा है:
-
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च (सार्वजनिक सेवा वाले), अनाथालय, वृद्धाश्रम, धर्मशालाएं, श्मशान, कब्रिस्तान और गौशालाएं।
-
सरकारी स्कूल, सरकारी अस्पताल और केवल कृषि कार्य में इस्तेमाल होने वाली भूमि।
-
स्वतंत्रता सेनानी, युद्ध विधवाएं और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के स्कूल।
-
नव-शामिल गांवों के लाल डोरा क्षेत्र की आवासीय संपत्तियों को शुरुआती 5 वर्षों तक पूर्ण छूट।
-
सैनिकों को राहत: सेवारत व पूर्व सैनिकों, अर्धसैनिक बलों के जवानों और शहीद परिवारों के 250 वर्ग मीटर तक के स्व-अधिवासित (Self-occupied) मकानों पर 100% छूट मिलेगी।
महिलाओं और ईमानदार करदाताओं को विशेष छूट (Discounts)
-
समय पर भुगतान: 30 अप्रैल तक बकाया जमा करने पर 10% छूट तथा लगातार तीन वर्ष समय पर टैक्स भरने वालों को 5% अतिरिक्त छूट।
-
महिलाओं के नाम संपत्ति: महिलाओं के स्वामित्व वाली आवासीय संपत्तियों पर 25% तक छूट।
-
दिव्यांगजन: 40% या उससे अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के आवासीय मकानों पर 10% छूट।
-
पर्यावरण प्रोत्साहन: शून्य अपशिष्ट प्रबंधन (Zero Waste System) अपनाने वाली ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों को 10% छूट।
-
लाल डोरा क्षेत्र: लाल डोरा की आवासीय संपत्तियों पर 75% तक छूट। (नोट: किसी भी एक संपत्ति पर मिलने वाली कुल संयुक्त छूट अधिकतम 25% तक सीमित रहेगी।)
पुराने करदाताओं और बकाएदारों को राहत
-
1 महीने का ग्रेस पीरियड: नई अधिसूचना लागू होने के बाद भी मकान मालिकों को 1 महीने तक वर्ष 2013 के पुराने नियमों के अनुसार टैक्स भरने का विकल्प मिलेगा।
-
कोई अतिरिक्त बोझ नहीं: जिन लोगों ने पहले ही अपना टैक्स जमा कर दिया है, उन पर वित्तीय वर्ष 2026-27 तक इस बदलाव का कोई अतिरिक्त असर नहीं पड़ेगा।
-
पुराना बकाया: वित्तीय वर्ष 2025-26 और उससे पहले के बकाए या ब्याज पर नई नीति लागू नहीं होगी।
सरकार का मानना है कि इस सुधार से जहां आम नागरिकों के लिए कर प्रक्रिया पारदर्शी और आसान होगी, वहीं निकायों की आय बढ़ने से शहरों के विकास कार्यों को गति मिलेगी।


