HomeHaryanaहरियाणा में सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर HC हुआ सख्त

हरियाणा में सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर HC हुआ सख्त

क्या आपने कभी सोचा है कि सरकारी भर्ती में लोक सेवा आयोग कितनी दूर तक जा सकता है? क्या वो आपके अनुभव को चेक कर सकता है, दस्तावेजों को रिजेक्ट कर सकता है? अगर आपका जवाब हां है, तो रुकिए! क्योंकि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा लोक सेवा आयोग यानी HPSC और उसके चेयरमैन आलोक वर्मा को ऐसी फटकार लगाई है कि अब भर्ती प्रक्रिया की पूरी पिक्चर बदल सकती है! ये स्टोरी है एक उम्मीदवार की जीत की, जो लाखों सरकारी जॉब्स के सपने देखने वालों के लिए उम्मीद की किरण है। चलिए, डिटेल में डाइव करते हैं!

HPSC की मनमानी

साल 2018… हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन यानी HSIIDC में मैनेजर (यूटिलिटी) के 7 पदों के लिए भर्ती निकली। उम्मीदवार प्रसून शर्मा ने अप्लाई किया – उनके पास निजी कंपनी और राज्य के सिंचाई विभाग में अनुभव था। लिखित परीक्षा पास की, शुरुआती स्क्रूटनी में सब ठीक। लेकिन फिर आया ट्विस्ट!HPSC ने अचानक से बैंक स्टेटमेंट, EPF, ESI और टैक्स रिकॉर्ड जैसे डॉक्यूमेंट्स मांग लिए – जो ओरिजिनल ऐडवर्टाइजमेंट में कहीं नहीं थे!

HC की फटकार

दोस्तों, ये सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि सिस्टम की मनमानी का सबूत है! लेकिन हाईकोर्ट ने इसे बर्दाश्त नहीं किया। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने साफ कहा – “HPSC की भूमिका सिर्फ सिलेक्शन और रेकमेंडेशन तक है। अनुभव वेरिफिकेशन या डॉक्यूमेंट वैलिडिटी चेक करने का हक सिर्फ अपॉइंटमेंट अथॉरिटी यानी डिपार्टमेंट को है!कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 1985 के फैसले का हवाला दिया – जतिंदर कुमार vs पंजाब राज्य। इसमें साफ है कि PSC की रेकमेंडेशंस सिर्फ एडवाइजरी हैं, फाइनल डिसीजन गवर्नमेंट का। और यहां HSIIDC ने तो पहले ही एक कमिटी बनाकर प्रसून के डॉक्यूमेंट्स को वैलिड पाया था! फिर HPSC की दखलअंदाजी क्यों? कोर्ट ने इसे इंस्टीट्यूशनल बैलेंस के खिलाफ बताया।

नतीजा? कोर्ट ने HSIIDC को ऑर्डर दिया कि प्रसून शर्मा की अपॉइंटमेंट पर विचार करे, उन्हें बैच के बाकी कैंडिडेट्स की तरह नोमिनल बेनिफिट्स दे। और सबसे बड़ा पंच – ऑर्डर की कॉपी हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी को भेजी गई, ताकि फ्यूचर में ऐसी ओवररीचिंग न हो!

दोस्तों, ये फैसला लाखों युवाओं के लिए गेम चेंजर है! अगर आप सरकारी जॉब की तैयारी कर रहे हैं, तो ये जानना जरूरी है कि आयोग की पावर लिमिटेड है। क्या आपने कभी ऐसी मनमानी फेस की?

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