HomeHaryanaहरियाणा राज्यसभा चुनाव: कांटे की टक्कर में BJP और कांग्रेस की जीत

हरियाणा राज्यसभा चुनाव: कांटे की टक्कर में BJP और कांग्रेस की जीत

Haryana Desk: हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे बेहद नाटकीय रहे। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने जीत दर्ज की है। आंकड़ों के खेल और रद्द हुए वोटों के कारण यह मुकाबला अंत तक सस्पेंस से भरा रहा।

वोटों का गणित: रद्द वोट और अनुपस्थिति

हरियाणा विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं, लेकिन राज्यसभा चुनाव के समीकरणों में कई उतार-चढ़ाव आए:

  • वोट नहीं डाला: इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के 2 विधायकों ने मतदान से दूरी बनाई।

  • रद्द हुए वोट: कुल 5 वोट रद्द हुए, जिनमें कांग्रेस के 4 और भाजपा का 1 वोट शामिल है।

  • वैध वोट: 90 में से प्रभावी रूप से केवल 83 वोट ही गिनती के लिए मान्य पाए गए।

कैसे तय हुई जीत (कोटा फॉर्मूला)

राज्यसभा चुनाव में जीत का आंकड़ा (कोटा) निकालने के लिए कुल वैध वोटों को सीटों की संख्या (+1) से भाग दिया जाता है और फिर उसमें 1 जोड़ दिया जाता है।

कोटा: $83 / (2 + 1) = 27.66$

  • संजय भाटिया (BJP): इन्हें पहली प्राथमिकता के 39 वोट मिले। कोटे के अनुसार 27.66 वोटों के साथ इनकी जीत पक्की हुई और इनके अतिरिक्त 11.34 वोट दूसरी प्राथमिकता के उम्मीदवार को शिफ्ट हो गए।

  • कर्मवीर बौद्ध (Congress): कांग्रेस के पास 37 विधायक थे, जिनमें से 4 वोट रद्द हुए और 5 ने क्रॉस वोटिंग की। इसके बावजूद कांग्रेस के पास 28 वोट बचे, जो जीत के कोटे (27.66) से अधिक थे।

सतीश नांदल की हार का विश्लेषण

भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को पहली प्राथमिकता के 16 वोट मिले (भाजपा के 8, कांग्रेस के 5 और 3 निर्दलीय)। जब संजय भाटिया के अतिरिक्त 11.34 वोट उन्हें मिले, तो उनकी कुल वोट वैल्यू 27.34 हो गई। वह कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध (28 वोट) से मात्र 0.66 के मामूली अंतर से पिछड़ गए।

हार-जीत के बड़े कारण

इस चुनाव में हार और जीत के पीछे तीन प्रमुख मोड़ रहे:

  1. भाजपा का रद्द वोट: यदि भाजपा का एक वोट रद्द न होता, तो नांदल की वोट वैल्यू कांग्रेस से अधिक हो जाती और वह जीत जाते।

  2. इनेलो की तटस्थता: यदि इनेलो के 2 विधायकों ने नांदल को वोट दिया होता, तो उनकी जीत निश्चित थी।

  3. कांग्रेस की किस्मत: 9 वोट (4 रद्द + 5 क्रॉस वोटिंग) गंवाने के बाद भी कोटा कम होने (83 वैध वोट) की वजह से कांग्रेस 28 वोटों के साथ बाजी मार ले गई।

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