HARYANA DESK : हरियाणा सरकार ने राज्य में वर्षों से बिना अनुमति के चल रही अवैध औद्योगिक कॉलोनियों और इंडस्ट्रियल क्लस्टरों को एक बहुत बड़ी राहत दी है। सरकार ने इन कॉलोनियों को नियमित (Regularize) करने के लिए एक नई नीति लागू कर दी है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (Town and Country Planning Department) की इस पहल से प्रदेश भर के हजारों उद्यमियों को अब कानूनी मान्यता मिल सकेगी।
नई रेगुलराइजेशन नीति की मुख्य शर्तें
सरकार द्वारा जारी की गई नई नीति का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित पात्रता शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा:
-
क्षेत्रफल और इकाइयाँ: औद्योगिक कॉलोनी का क्षेत्रफल कम से कम 10 एकड़ होना चाहिए और उसमें न्यूनतम 50 औद्योगिक इकाइयाँ (फैक्ट्रियां) संचालित होनी चाहिए।
-
समय सीमा: यह योजना केवल उन्हीं औद्योगिक कॉलोनियों पर लागू होगी, जिनका विकास 3 अक्टूबर 2025 से पहले हो चुका है।
-
उद्देश्य: इस नीति का मुख्य उद्देश्य इन अनधिकृत क्षेत्रों में बुनियादी नागरिक सुविधाएं जैसे—पक्की सड़कें, पेयजल, सीवरेज नेटवर्क, बिजली की उचित व्यवस्था और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास सुनिश्चित करना है।
आवेदन की प्रक्रिया: नियुक्त होगा ‘अधिकृत व्यक्ति’
भ्रष्टाचार और अव्यवस्था को रोकने के लिए सरकार ने आवेदन की एक पारदर्शी प्रक्रिया तैयार की है:
-
ऑथराइज्ड पर्सन: प्रत्येक औद्योगिक कॉलोनी के लिए एक अधिकृत व्यक्ति (Authorized Person) नियुक्त किया जाएगा। यह व्यक्ति कॉलोनी की सभी औद्योगिक इकाइयों की तरफ से एक साथ ऑनलाइन आवेदन करेगा।
-
जरूरी दस्तावेज: आवेदन के साथ लेआउट प्लान, सर्वे मैप, जमीन के मालिकाना हक के दस्तावेज, प्रोडक्शन सर्टिफिकेट, लीज डॉक्युमेंट्स, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) की सहमति, फायर एनओसी (Fire NOC) और फैक्ट्री लाइसेंस जमा करने होंगे।
-
जांच प्रक्रिया: ऑनलाइन आवेदन मिलने के बाद उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के निदेशक (Director) स्तर पर दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच होगी। सब कुछ सही पाए जाने पर ही नियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
बजट 2025 की घोषणा पर अमल
यह नीति मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा बजट 2025 में की गई घोषणा के तहत लाई गई है।
निष्कर्ष: हरियाणा सरकार के इस कदम से न केवल लंबे समय से कानूनी मान्यता का इंतजार कर रहे हजारों छोटे-बड़े उद्यमियों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि अवैध रूप से चल रहे क्षेत्रों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं आने से राज्य के औद्योगिक विकास और निवेश (Investment) को एक नई रफ्तार मिलेगी।


