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हुड्डा के सपने पर फिर गया पानी ! नेता विपक्ष पर शैलजा ने चली चाल!

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे चैनल MSTV India पर! हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हो गया है। लेकिन कांग्रेस पार्टी में अभी से हंगामा मचा हुआ है! नेता विपक्ष की कुर्सी पर कौन बैठेगा? भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सपनों पर पानी फिर सकता है, क्योंकि कुमारी सैलजा और चौधरी बीरेंद्र सिंह के बीच एक सीक्रेट डील हो गई है! क्या ये डील कांग्रेस को एकजुट करेगी या और ज्यादा बिखेर देगी?

क्या हुड्डा की LoP बनने की ख्वाहिश पूरी होगी?

चुनाव के 10 महीने बाद भी कांग्रेस ने अपना CLP लीडर नहीं चुना, जो LoP बनता है। नवंबर 2024 की विंटर सेशन हो या अब मानसून सेशन, पार्टी बिना LoP के ही विधानसभा में जा रही है। ये कितनी शर्मनाक बात है! और अब, सत्र से एक दिन पहले, पार्टी के अंदर से आवाजें उठ रही हैं कि हुड्डा को LoP नहीं बनाना चाहिए। क्यों? क्योंकि हुड्डा गुट और सैलजा गुट के बीच पुरानी रंजिश है।

कुमारी सैलजा, जो सिरसा से लोकसभा MP हैं, और चौधरी बीरेंद्र सिंह, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं– इन दोनों के बीच एक डील हो गई है! सूत्रों के मुताबिक, ये डील हुड्डा को LoP बनने से रोकने की है। सैलजा Dalit चेहरा हैं, और बीरेंद्र सिंह Jat चेहरा, लेकिन उनका बेटा बृजेंद्र सिंह भी कांग्रेस में है। ये दोनों मिलकर पार्टी हाईकमान पर दबाव डाल रहे हैं कि LoP कोई नया चेहरा हो, जो गुटबाजी से ऊपर हो। हुड्डा, जो Jat समुदाय से हैं, को लगता है कि LoP उनका हक है, लेकिन सैलजा-बीरेंद्र की जोड़ी कह रही है – “नहीं, अब बदलाव का समय है!

क्या ये डील राहुल गांधी तक पहुंच गई है?

जून 2025 में राहुल ने हरियाणा कांग्रेस को रिवैंप करने की मीटिंग की थी, जहां उन्होंने कहा था – “मेरिट पर काम होगा, न कि गुटबाजी पर।” लेकिन अब ये डील क्या रंग लाएगी? क्या हुड्डा का सपना चूर हो जाएगा?दोस्तों, ये ड्रामा सिर्फ LoP का नहीं है। ये कांग्रेस की हरियाणा में सर्वाइवल की लड़ाई है। पार्टी 2024 चुनाव हार गई क्योंकि गुटबाजी की वजह से। हुड्डा को चुनाव हार का “फादर” कहा गया, और राहुल ने खुद जिम्मेदारी ली। अब, अगस्त 2025 में पार्टी रिवैंप हो रही है – नए डिस्ट्रिक्ट चीफ्स लगाए गए, हुड्डा और सैलजा गुटों को बराबर शेयर दिया गया। लेकिन LoP का फैसला अटका हुआ है। अगर सैलजा-बीरेंद्र की डील कामयाब हुई, तो हुड्डा साइडलाइन हो सकते हैं, और पार्टी में नॉन-जाट लीडरशिप मजबूत होगी। लेकिन अगर हुड्डा जीते, तो गुटबाजी और बढ़ सकती है।

और दोस्तों, ये सत्र भी कम दिलचस्प नहीं। BJP सरकार पर कांग्रेस हमला बोलेगी – किसान मुद्दे, बेरोजगारी, अग्निपथ स्कीम। लेकिन बिना LoP के, उनका हमला कमजोर पड़ेगा। क्या पार्टी आखिरी मिनट में फैसला लेगी? या ये ड्रामा सत्र में भी जारी रहेगा? दोस्तों, हरियाणा की ये सियासी जंग देखने लायक है। अगर आपको ये अपडेट पसंद आया, तो लाइक थंब्स अप करो, शेयर करो अपने दोस्तों से, और कमेंट में बताओ – कौन बनेगा LoP? हुड्डा, सैलजा का कोई, या कोई सरप्राइज?

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