ENTERTAINMENT DESK : अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटाए जाने के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच सरकारी सूत्रों ने दावा किया है कि फिल्म को हटाने का फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया। सूत्रों का कहना है कि फिल्म की कुछ सामग्री का इस्तेमाल भारत विरोधी ताकतें अपने प्रचार के लिए कर सकती थीं, इसलिए इसे भारत में फिलहाल उपलब्ध नहीं रखने का निर्णय लिया गया। सूत्रों के अनुसार, फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है और इसमें पंजाब के उग्रवाद के दौर की कई संवेदनशील घटनाओं को दिखाया गया है।
सरकार का मानना है कि ऐसे विषयों को गलत संदर्भ में पेश कर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है, खासकर जब देश विरोधी संगठन पहले से ही इस तरह के मुद्दों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर करते रहे हैं। बताया जा रहा है कि फिल्म को पहले ‘Punjab 95’ नाम से रिलीज किया जाना था, लेकिन लंबे समय तक सेंसर संबंधी विवादों के बाद इसका नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा गया। आखिरकार 3 जुलाई को यह ZEE5 पर रिलीज हुई, लेकिन केवल दो दिन बाद ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। ZEE5 ने अपने बयान में कहा कि फिल्म “अगली सूचना तक भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी।”
फिल्म हटाए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। कई नेताओं और फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा बताया है, जबकि सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह फैसला किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि सुरक्षा संबंधी पहलुओं और संभावित दुरुपयोग की आशंकाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है। उधर, दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक बार फिल्म दर्शकों तक पहुंच जाए तो उसकी कहानी को रोका नहीं जा सकता। फिल्म को लेकर बहस जारी है और फिलहाल इसके भारत में दोबारा उपलब्ध होने को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।



