ENTERTAINMENT DESK : दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ अपनाए जा रहे सख्त रवैये से लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े होते हैं। साथ ही उन्होंने इसकी तुलना अमेरिका में प्रवासियों के खिलाफ की जाने वाली कड़ी कार्रवाई से की। नसीरुद्दीन शाह का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में नागरिकों, खासकर छात्रों को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि यदि विरोध की आवाज़ को बल प्रयोग से दबाने की कोशिश की जाती है, तो इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित होती है।
अभिनेता ने कहा कि छात्रों के साथ कठोर व्यवहार समाज में गलत संदेश देता है। उनके अनुसार, किसी भी असहमति का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए निकाला जाना चाहिए, न कि दमनात्मक कदमों के माध्यम से। शाह ने अमेरिका की आव्रजन एजेंसी द्वारा प्रवासियों के खिलाफ की जाने वाली सख्त कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि विरोध करने वाले छात्रों के साथ कुछ स्थानों पर जिस तरह का व्यवहार देखने को मिला, उससे उन्हें उसी तरह की सख्ती की याद आती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
हाल के समय में विभिन्न शिक्षण संस्थानों में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और उन पर प्रशासन की कार्रवाई को लेकर लगातार बहस चल रही है। इसी संदर्भ में नसीरुद्दीन शाह की यह टिप्पणी भी चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने उनकी बात का समर्थन किया, जबकि कुछ ने इससे असहमति जताई। नसीरुद्दीन शाह पहले भी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं। उनका मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए संवाद, असहमति का सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा आवश्यक है।


