SPORTS DESK : बिहार के युवा खिलाड़ी झंडू कुमार ने संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की मिसाल पेश करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए पहला पदक जीतकर इतिहास रच दिया। आर्थिक तंगी से जूझते हुए कभी सब्जियां बेचने और बाद में परिवार का गुजारा चलाने के लिए ई-रिक्शा चलाने वाले झंडू कुमार की सफलता आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई है। रिपोर्ट के अनुसार, झंडू कुमार का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। परिवार की आर्थिक मदद के लिए उन्होंने कम उम्र में ही सब्जियां बेचनी शुरू कर दी थीं। बाद में उन्होंने ई-रिक्शा चलाकर घर की जिम्मेदारियों को संभाला। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने खेल से अपना रिश्ता नहीं छोड़ा और लगातार अभ्यास जारी रखा।
सीमित संसाधनों के बीच भी झंडू ने अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा। कठिन मेहनत, अनुशासन और कोचों के मार्गदर्शन की बदौलत उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और फिर भारतीय टीम में जगह हासिल की। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उनका शानदार प्रदर्शन भारत के लिए पहला पदक लेकर आया। झंडू कुमार ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, कोच और उन सभी लोगों को दिया जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि संघर्ष ने उन्हें मजबूत बनाया और कभी हार न मानने की सीख दी। उनका मानना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं।
उनकी उपलब्धि के बाद बिहार में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने झंडू कुमार को बधाई देते हुए कहा कि उनकी कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। सोशल मीडिया पर भी उनकी संघर्ष यात्रा और सफलता की जमकर चर्चा हो रही है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए पहला पदक जीतकर झंडू कुमार ने यह साबित कर दिया कि सपनों को पूरा करने के लिए सुविधाओं से ज्यादा जरूरी हौसला और मेहनत होती है। उनकी सफलता भारतीय खेल जगत में लंबे समय तक याद की जाएगी।


