स्पोर्ट्स डेस्क: भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच के रूप में गौतम गंभीर का आगाज जितना धमाकेदार होने की उम्मीद थी, उनका कार्यकाल अब उतने ही विवादों और शर्मनाक रिकॉर्ड्स के घेरे में आ गया है। जुलाई 2024 में कमान संभालने के बाद गंभीर ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और एशिया कप 2025 जैसे बड़े खिताब तो जीते, लेकिन उनके खाते में कुछ ऐसी हार भी जुड़ गई हैं जिन्होंने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को गहरे जख्म दिए हैं।
इंदौर में टूटा 37 साल का सूखा: न्यूजीलैंड का ऐतिहासिक कब्जा
हाल ही में इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेले गए तीसरे वनडे में न्यूजीलैंड ने भारत को 41 रनों से हराकर 2-1 से सीरीज अपने नाम कर ली। यह हार इसलिए भी चुभने वाली है क्योंकि:
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पहली द्विपक्षीय सीरीज जीत: न्यूजीलैंड ने 1989 के बाद पहली बार भारतीय सरजमीं पर कोई द्विपक्षीय वनडे सीरीज जीती है।
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इंदौर का किला ढहा: होलकर स्टेडियम में इससे पहले खेले गए 8 वनडे मैचों में भारत अजेय था, लेकिन गंभीर-गिल की जोड़ी इस रिकॉर्ड को नहीं बचा सकी।
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युवा कीवी टीम का वार: न्यूजीलैंड की इस टीम में कई दिग्गज खिलाड़ी नहीं थे और कई युवा खिलाड़ियों (क्रिस्टियन क्लार्क, जैक फाल्क्स आदि) ने इसी सीरीज में डेब्यू किया था।
गंभीर की कोचिंग में ‘पहली बार’ होने वाली शर्मनाक घटनाएं
गौतम गंभीर का कार्यकाल अब उन रिकॉर्ड्स के लिए जाना जा रहा है जो पिछले 2-3 दशकों में कभी नहीं हुए। 12 साल में पहली बार भारत ने घरेलू टेस्ट सीरीज हारी और 25 साल बाद अपने घर में पहली बार क्लीन स्वीप (0-3) का सामना किया।
गौतम गंभीर के कार्यकाल के दाग:
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श्रीलंका से हार (2024): 1997 के बाद पहली बार श्रीलंका से वनडे सीरीज में शिकस्त।
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न्यूजीलैंड से टेस्ट हार (2024): 36 साल बाद घर में कीवियों से टेस्ट मैच और सीरीज गंवानी पड़ी।
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क्लीन स्वीप का कलंक: साल 2000 के बाद पहली बार घरेलू सरजमीं पर टेस्ट सीरीज में वाइटवॉश।
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ऐतिहासिक कम स्कोर: बेंगलुरु टेस्ट में टीम इंडिया का महज 46 रनों पर ढेर होना।
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बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (2025): 2015 के बाद पहली बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज हारना।
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WTC फाइनल से बाहर: पहली बार भारतीय टीम वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की दौड़ से बाहर हुई।
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घर में वनडे सीरीज (2026): 37 साल में पहली बार न्यूजीलैंड ने भारत में वनडे सीरीज जीती।
कप्तान शुभमन गिल की साख पर खतरा
कोच गंभीर के साथ-साथ कप्तान शुभमन गिल की रणनीतियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। गिल न केवल खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं, बल्कि टी-20 टीम से बाहर होने के बाद अब वनडे कप्तानी में भी उनकी साख कमजोर हुई है। इंदौर की हार ने यह साबित कर दिया है कि विराट कोहली के 54वें वनडे शतक जैसी व्यक्तिगत पारियां टीम को तब तक नहीं बचा सकतीं, जब तक कोच और कप्तान की सामूहिक रणनीति सही न हो।
