हरियाणा डेस्कः न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी रश्मीत कौर की अदालत ने घर में अवैध रूप से घुसकर हथियार के बल पर दहशत फैलाने के मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। अदालत ने झज्जर के रहने वाले सतपाल, सुखराली निवासी नवीन कुमार और बाला देवी को तीन-तीन साल के कारावास और 15-15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
10 साल पहले क्या हुआ था?
यह मामला 14 जुलाई 2016 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता रेशमा राणा अपने बेटों के साथ घर पर मौजूद थीं, तभी सतपाल, नवीन और बाला देवी जबरन उनके बेडरूम तक घुस आए।
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धमकी का तरीका: सतपाल ने अपनी रिवॉल्वर निकालकर बिस्तर पर रख दी और बाला देवी के पुराने कर्ज की वसूली के लिए दबाव बनाने लगा।
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दहशत: आरोपियों ने परिवार को डराते हुए शेखी बघारी कि वे पहले भी 20-22 कत्ल कर चुके हैं और पैसे न मिलने पर पूरे परिवार को खत्म कर देंगे। जब रेशमा के पति सुरेंद्र राणा घर पहुँचे, तो आरोपियों ने उन पर और बच्चों पर भी हथियार तान दिया था।
बच्चों की सूझबूझ और वैज्ञानिक साक्ष्य बने ढाल
इस केस को सुलझाने और दोषियों को सजा दिलाने में रेशमा के दो बेटों, अमन और युवराज की बहादुरी निर्णायक साबित हुई।
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फोटो का सबूत: जब आरोपी अपनी सैंट्रो कार से भाग रहे थे, तब बच्चों ने उनकी तस्वीरें खींच ली थीं।
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रिकॉर्डिंग: पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर धमकी भरी रिकॉर्डिंग वाली पेन ड्राइव और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को अदालत में पेश किया। इन पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों के सामने बचाव पक्ष की यह दलील खारिज हो गई कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।
अदालत का फैसला
अदालत ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर तीनों को दोषी माना। हालांकि, आरोपी सतपाल के पास हथियार का वैध लाइसेंस होने के कारण उसे आर्म्स एक्ट की धाराओं से बरी कर दिया गया, लेकिन घर में जबरन घुसने और डराने-धमकाने के गंभीर अपराध के लिए उसे सजा सुनाई गई।
अदालत की टिप्पणी: अदालत ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक साक्ष्य (फोटो और रिकॉर्डिंग) आरोपियों के अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं, भले ही मौके पर कोई सार्वजनिक गवाह मौजूद न रहा हो।
