स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में लगातार चार जीत दर्ज कर ‘सूर्या ब्रिगेड’ ने सुपर-8 में अपनी जगह पक्की कर ली है। ग्रुप-ए में +2.500 के शानदार नेट रन रेट के साथ शीर्ष पर रहने वाली भारतीय टीम का प्रदर्शन अब तक लाजवाब रहा है। भारत ने अमेरिका, पाकिस्तान, नामीबिया और नीदरलैंड्स को धूल चटाकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं।
हालांकि, असली परीक्षा अब शुरू होगी। बड़े मुकाबलों और नॉकआउट स्टेज से पहले टीम इंडिया के गेम प्लान में कुछ ऐसी दरारें नजर आ रही हैं, जिन्हें समय रहते नहीं भरा गया तो वर्ल्ड कप जीतने का सपना टूट सकता है। आइए नजर डालते हैं भारत की उन 3 बड़ी कमजोरियों पर:
1. फील्डिंग में लापरवाही पड़ सकती है भारी
ग्रुप स्टेज के दौरान भारतीय खिलाड़ियों का मैदान पर प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। नीदरलैंड्स के खिलाफ पिछले मैच में टीम की ‘लचर फील्डिंग’ उजागर हुई, जहां आखिरी ओवर में लगातार दो कैच छोड़े गए। पहले तालमेल की कमी के कारण कप्तान सूर्या और रिंकू सिंह आपस में टकरा गए, और फिर तिलक वर्मा ने भी मौका गंवाया। सुपर-8 में एक कैच छोड़ना पूरे टूर्नामेंट से बाहर होने का कारण बन सकता है।
2. टॉप-ऑर्डर की खामोशी और निरंतरता का अभाव
मिडल ऑर्डर में सूर्या और हार्दिक पांड्या ने मोर्चा संभाल रखा है, लेकिन सलामी जोड़ी टीम को वो ‘फ्लाइंग स्टार्ट’ नहीं दे पा रही है जिसकी जरूरत है।
-
अभिषेक शर्मा का फॉर्म: अभिषेक का बल्ला अब तक खामोश रहा है, जिससे पावरप्ले में रन गति धीमी रही है।
-
दबाव: शुरुआती विकेट जल्दी गिरने से मिडल ऑर्डर पर अतिरिक्त दबाव आ रहा है। सुपर-8 की चुनौतीपूर्ण पिचों पर ईशान किशन और अभिषेक शर्मा को पावरप्ले के 6 ओवरों का बेहतर इस्तेमाल करना होगा।
3. ‘मिस्ट्री स्पिन’ के जाल में फंसते बल्लेबाज
वेस्टइंडीज की स्पिन-फ्रेंडली पिचों पर जाने से पहले भारत के लिए स्पिनर्स को खेलना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। पाकिस्तान के खिलाफ मैच में उस्मान तारिक जैसे मिस्ट्री स्पिनर्स के सामने भारतीय बल्लेबाज असहज दिखे थे। सुपर-8 में स्पिनर्स का रोल निर्णायक होगा, ऐसे में बल्लेबाजों को अपने फुटवर्क और स्पिन को पढ़ने की तकनीक पर काम करना होगा।
