चंडीगढ़: हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए कानूनी मोर्चे पर एक बड़ी जीत सामने आई है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंचकूला के बहुचर्चित एजेएल (Associated Journals Limited) जमीन आवंटन मामले में निचली अदालत (CBI Court) द्वारा आरोप तय करने के आदेश को रद्द कर दिया है।
हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ
न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए जांच एजेंसी की दलीलों पर गंभीर सवाल उठाए। हाईकोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
-
अपराध के सबूत नहीं: अदालत ने स्पष्ट किया कि सीबीआई द्वारा पेश की गई सामग्री प्रथम दृष्टया किसी भी प्रकार के आपराधिक कृत्य या साजिश को साबित करने में विफल रही है।
-
अधिकार क्षेत्र का सवाल: हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी जमीन आवंटन को अवैध घोषित करना या उसकी वैधता की जांच करना सीबीआई के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
-
आपराधिक मंशा का अभाव: उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने माना कि इस मामले में किसी भी आरोपी की कोई आपराधिक मंशा (Criminal Intent) स्पष्ट नहीं होती है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद पंचकूला के सेक्टर-6 में स्थित लगभग 3,360 वर्ग मीटर के एक सरकारी भूखंड के पुनः आवंटन से जुड़ा है।
-
आरोप: सीबीआई का आरोप था कि मुख्यमंत्री रहते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA) के अध्यक्ष के तौर पर अपने पद का दुरुपयोग कर नियमों के विरुद्ध जमीन का आवंटन किया।
-
आरोपी: इस मामले में हुड्डा के साथ-साथ हरियाणा सरकार के चार वरिष्ठ अधिकारियों को भी नामजद किया गया था।
-
जांच का सफर: हरियाणा विजिलेंस द्वारा दर्ज धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की एफआईआर के बाद ईडी (ED) ने भी इस मामले में अपनी जांच शुरू की थी।
फैसले का असर
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य आरोपित अधिकारियों को फिलहाल बड़ी राहत मिल गई है। कोर्ट ने माना कि निचली अदालत द्वारा आरोप तय करने का फैसला कानून के मानकों के अनुरूप नहीं था।
