चंडीगढ़: पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य के किसानों को बड़ी राहत देते हुए खजाने का मुंह खोल दिया है। कृषि क्षेत्र को संकट से उबारने और अन्नदाताओं की आय बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बजट में कई अहम घोषणाएं की हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों को दी जा रही मुफ्त बिजली सुविधा बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रहेगी। किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए सरकार ने बजट में 7,715 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि सिर्फ कृषि क्षेत्र की बिजली सब्सिडी के लिए आवंटित की है, ताकि खेती की लागत को कम किया जा सके।
पारंपरिक खेती से हटकर किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। वित्त मंत्री ने बताया कि बागवानी को बढ़ावा देने के लिए पंजाब सरकार जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) की मदद से एक विशेष और ऐतिहासिक प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। अगले दस सालों तक चलने वाले इस महात्वाकांक्षी कार्यक्रम पर 1,300 करोड़ रुपये की बड़ी रकम खर्च की जाएगी। इस योजना का मुख्य लक्ष्य राज्य में ऐसी आधुनिक बागवानी को बढ़ावा देना है जो बदलते मौसम की मार आसानी से झेल सके और किसानों को बंपर मुनाफा दे।
इस नए प्रोजेक्ट के तहत सरकार ने खेती के विविधीकरण का एक लंबा विजन तय किया है। इस योजना का सीधा उद्देश्य साल 2035 तक फल, सब्जियों, फूल और औषधीय फसलों के अधीन आने वाले रकबे को 4.59 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 17.34 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाना है। इसके साथ ही बेहतर सिंचाई व्यवस्था, आधुनिक कीट प्रबंधन और जैविक खेती जैसी सुरक्षित तकनीकों को भी जमीनी स्तर पर उतारा जाएगा। सरकार इस फंड का इस्तेमाल उच्च गुणवत्ता वाले नए बीजों, नर्सरी विकसित करने, रिसर्च, आधुनिक मंडियां बनाने, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने के साथ-साथ किसानों की ट्रेनिंग पर भी करेगी।
वित्त मंत्री ने विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि उनके इलाके के किसान अब तेजी से ड्रैगन फ्रूट जैसी नकदी और महंगी फसलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जो पंजाब की किसानी के लिए एक बेहद सकारात्मक बदलाव है। सरकार किसानों को केवल आर्थिक मदद ही नहीं देगी, बल्कि उन्हें आधुनिक खेती की ट्रेनिंग और कृषि विशेषज्ञों की उचित सलाह भी मुहैया कराएगी। इन नई और उन्नत तकनीकों को अपनाकर किसान जहां एक तरफ अपनी आय में भारी इजाफा कर सकेंगे, वहीं दूसरी ओर पानी जैसे बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों की भी बचत होगी।
