Haryana Desk: हरियाणा राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस आलाकमान इस बार पूरी तरह ‘एक्शन मोड’ में नजर आ रहा है। पिछले चुनावों में क्रॉस वोटिंग और तकनीकी गलतियों के कारण मिली हार से सबक लेते हुए, पार्टी ने अपने विधायकों के लिए कड़े नियम और स्पष्ट संदेश जारी किए हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस ने न केवल अपने विधायकों की किलेबंदी की है, बल्कि किसी भी प्रकार की चूक होने पर बड़े नेताओं पर भी गाज गिरने के संकेत दिए हैं।
हाईकमान की ‘क्लीन स्वीप’ की चेतावनी
कांग्रेस नेतृत्व ने हिमाचल प्रदेश में मौजूद और हरियाणा में रह गए सभी 37 विधायकों को स्पष्ट कर दिया है कि राज्यसभा चुनाव में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और वरिष्ठ नेताओं के जरिए यह संदेश दिया गया है कि यदि किसी भी विधायक की वोट रद्द होती है या क्रॉस वोटिंग होती है, तो इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा। सूत्रों की मानें तो आलाकमान ने “ऑपरेशन क्लीन” की चेतावनी देते हुए कहा है कि गड़बड़ी होने पर हरियाणा के बड़े नेताओं की जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं या उन पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध पर स्पष्ट स्टैंड
पार्टी ने विधायकों के मन से गुटबाजी का विचार निकालने के लिए स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध का चयन किसी खास धड़े की सिफारिश पर नहीं, बल्कि सीधे राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा किया गया है। आलाकमान ने उन चर्चाओं को भी खारिज कर दिया है जिनमें बौद्ध के गैर-राजनीतिक बैकग्राउंड (पूर्व अधिकारी) होने पर सवाल उठाए जा रहे थे। पार्टी का संदेश साफ है—उम्मीदवार कोई भी हो, पार्टी लाइन का पालन करना हर विधायक की जिम्मेदारी है।
तकनीकी चूक से बचने की कवायद
पिछले चुनावों के ‘पेन प्रकरण’ को देखते हुए इस बार विधायकों को मतदान की तकनीकी बारीकियों को लेकर भी सतर्क किया गया है। राज्यसभा चुनाव की जटिल वोटिंग प्रक्रिया में एक छोटी सी गलती भी वोट को अमान्य कर सकती है, इसलिए विधायकों को विशेष प्रशिक्षण और सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि हरियाणा कांग्रेस के भीतर अनुशासन और एकजुटता की असली परीक्षा है। अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस अपने कुनबे को एकजुट रख पाती है या हरियाणा की सियासत एक बार फिर कोई नया मोड़ लेती है।