चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘शानदार चार साल, भगवंत मान दे नाल’ कार्यक्रम की कड़ी में आज खेल विभाग की उपलब्धियों का लेखा-जोखा जनता के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने बताया कि किस तरह पिछले चार वर्षों में ‘आप’ सरकार ने पंजाब में खेल क्रांति लाकर राज्य की तस्वीर बदल दी है।
खेल बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी और ढांचागत सुधार
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि पंजाब सरकार ने खेलों को प्राथमिकता देते हुए बजट में अभूतपूर्व वृद्धि की है।
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बजट: खेल बजट को 350 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1791 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
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कोच: राज्य में खेल प्रशिक्षकों (कोचों) की संख्या 500 से बढ़ाकर 2458 की गई है।
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मैदान और जिम: प्रदेश में 3100 खेल मैदानों का विकास किया गया है और 3000 नए जिम स्थापित किए गए हैं।
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खेडां वतन पंजाब दीयां: इस मुहिम के तहत खिलाड़ियों की संख्या 1.5 लाख से बढ़कर 5 लाख तक पहुँच गई है।
खिलाड़ियों को सीधी वित्तीय सहायता
नई खेल नीति 2023 के तहत खिलाड़ियों को तैयारी के लिए नकद राशि दी जा रही है:
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ओलंपिक: तैयारी के लिए 15 लाख रुपये की सहायता।
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एशियाई खेल: खिलाड़ियों को 8 लाख रुपये की वित्तीय मदद।
पंजाब को मिली ‘एशियन चैंपियंस ट्रॉफी’ की मेजबानी
मुख्यमंत्री ने एक बड़ी उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि पंजाब के इतिहास में पहली बार अक्टूबर 2026 में अंतरराष्ट्रीय ‘हॉकी एशियन चैंपियंस ट्रॉफी’ का आयोजन किया जाएगा।
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वेन्यू: यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट मोहाली के बलबीर सिंह सीनियर हॉकी स्टेडियम और जालंधर के सुरजीत हॉकी स्टेडियम में खेला जाएगा।
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टीमें: इसमें भारत, पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, जापान, मलेशिया और चीन की टीमें हिस्सा लेंगी।
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सांस्कृतिक संगम: मैचों के दौरान भांगड़ा और गिद्धा के माध्यम से पंजाबी संस्कृति का प्रदर्शन कर दुनिया को प्रभावित किया जाएगा।
पंजाब की समृद्ध खेल विरासत और वर्तमान सितारे
मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ पंजाब के उन खिलाड़ियों का जिक्र किया जो वर्तमान में भारतीय टीमों का नेतृत्व कर रहे हैं:
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हॉकी: हरमनप्रीत सिंह और हार्दिक सिंह।
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क्रिकेट: शुभमन गिल, हरमनप्रीत कौर, अभिषेक शर्मा और अर्शदीप सिंह।
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फुटबॉल व बास्केटबॉल: गुरप्रीत सिंह संधू और पलप्रीत सिंह बराड़।
उन्होंने बलबीर सिंह सीनियर और अजीत पाल सिंह जैसे महान खिलाड़ियों को याद करते हुए कहा कि पंजाब की धरती ने हमेशा से चैंपियन पैदा किए हैं। मुख्यमंत्री ने गुरु साहिबान द्वारा स्थापित ‘मल्ल अखाड़ों’ और पारंपरिक खेलों (होला मोहल्ला) का उदाहरण देते हुए कहा कि खेल पंजाबियों के खून में है।