‘विकसित भारत’ की ओर बड़ा कदम: केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने 1 लाख करोड़ के ‘शहरी चुनौती कोष’ का किया शुभारंभ

Haryana

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप, देश के शहरी बुनियादी ढांचे को नई गति और वित्तीय मजबूती देने के लिए केंद्रीय ऊर्जा, शहरी विकास एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल ‘शहरी चुनौती कोष’ (Urban Challenge Fund – UCF) और ‘क्रेडिट पुनर्भुगतान गारंटी उप-योजना’ (CRGSS) का औपचारिक उद्घाटन किया।

क्या है यह महत्वाकांक्षी योजना?

1 लाख करोड़ रुपये के इस फंड का उद्देश्य केवल अनुदान देना नहीं, बल्कि शहरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और निवेश के लिए सक्षम बनाना है। इस कोष के माध्यम से केंद्र सरकार अगले कुछ वर्षों में 4 लाख करोड़ रुपये तक का कुल निवेश आकर्षित करने का रोडमैप तैयार कर रही है।

फंडिंग का मॉडल: सरकारी मदद से ज्यादा निजी निवेश पर जोर

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पारंपरिक सरकारी अनुदान प्रणाली से अलग है:

  • केंद्रीय सहायता: परियोजना लागत का अधिकतम 25% हिस्सा ही केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

  • निजी भागीदारी (PPP): कम से कम 50% फंड म्युनिसिपल बॉन्ड, बैंक ऋण और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के माध्यम से जुटाना अनिवार्य होगा। इससे शहरों में वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा।

  • बजट आवंटन: 90,000 करोड़ रुपये मुख्य परियोजनाओं के लिए, 5,000 करोड़ रुपये क्षमता निर्माण (Capacity Building) के लिए और 5,000 करोड़ रुपये क्रेडिट गारंटी के लिए रखे गए हैं।

टियर-2 और टियर-3 शहरों पर विशेष फोकस

योजना का मुख्य लक्ष्य छोटे और मंझोले शहरों (टियर-2 और टियर-3) को सशक्त बनाना है। यह कोष वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगा। इसके दायरे में आने वाली प्रमुख परियोजनाएं निम्नलिखित हैं:

  • पुराने शहरों और बाजारों का पुनर्विकास।

  • शहरी परिवहन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी।

  • जल आपूर्ति, स्वच्छता और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचा।

  • गैर-मोटर चालित परिवहन को बढ़ावा।

शहरों को ‘ग्रोथ इंजन’ बनाना मुख्य उद्देश्य

आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कटिकिथाला ने कहा कि यह पहल शहरों को ‘वित्तीय रूप से जवाबदेह’ बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है। कार्यक्रम के दौरान एक ई-डायरेक्टरी भी लॉन्च की गई, जो नगर निकायों को सीधे वित्तीय संस्थानों और बैंकों से जोड़ेगी ताकि वे अपनी परियोजनाओं के लिए आसानी से फंडिंग जुटा सकें।

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