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हरियाणा श्रम विभाग घोटाला: वर्क स्लिप के बाद अब अन्य स्कीमों की भी होगी जांच, मंत्री विज सख्त

Haryana Desk: हरियाणा के श्रम, ऊर्जा और परिवहन मंत्री विभाग में हुए व्यापक भ्रष्टाचार को लेकर पूरी तरह से एक्शन मोड में हैं। ‘वर्क स्लिप’ घोटाले के खुलासे के बाद, अब मंत्री की नजर विभाग की अन्य कल्याणकारी योजनाओं में हुई धांधली पर है। सूत्रों के अनुसार, श्रमिकों के नाम पर बिचौलियों द्वारा किए गए इस बड़े ‘खेल’ को उजागर करने के लिए जल्द ही और भी कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।

मजदूरों के हक पर डाका: 1500 करोड़ का महाघोटाला
हरियाणा में मजदूर कल्याण योजनाओं के नाम पर हुए इस घोटाले का दायरा 1500 करोड़ रुपये से भी अधिक का है। मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति और विभिन्न जिलों के उपायुक्तों (DC) की रिपोर्ट में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जांच में 90% से अधिक वर्क स्लिप फर्जी पाई गई हैं।

आंकड़ों में घोटाले की भयावहता:

  • कुल जांची गई स्लिप: 21,78,523

  • फर्जी/अमान्य स्लिप: 19,07,578 (लगभग 88%)

  • सही स्लिप: केवल 2,70,945

सबसे ज्यादा धांधली वाले जिले:

  • कैथल: 98.91% फर्जीवाड़ा

  • यमुनानगर: 98.67% फर्जीवाड़ा

  • पानीपत: 98.20% फर्जीवाड़ा

  • नूंह: 97.90% फर्जीवाड़ा

  • फरीदाबाद: 97.05% फर्जीवाड़ा

कैसे होता था ‘खेल’?
बिचौलियों ने फर्जी मजदूरों का पंजीकरण किया और बिना निर्माण कार्य किए ही ‘वर्क स्लिप’ जारी करवा लीं। एक-एक फर्जी लाभार्थी ने सरकारी खजाने से लगभग 2.5 लाख रुपये तक का अनुचित लाभ उठाया।

  • प्रमुख स्कीमों में गोलमाल: मातृत्व सहायता (36,000), विवाह सहायता (50,000), कोचिंग सहायता (1 लाख), दिव्यांग सहायता (3 लाख) और ई-स्कूटर प्रोत्साहन (50,000) जैसी योजनाओं का पैसा असली जरूरतमंदों के बजाय बिचौलियों की जेब में गया।

मंत्री विज की कार्रवाई और आगामी कदम
श्रम मंत्री ने स्वयं इस घोटाले का संज्ञान लेते हुए प्रारंभिक जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया। जिला स्तर पर डीसी की अगुवाई वाली टीमों ने पिछले दो साल के रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन किया है।

अब विभाग असली श्रमिकों को राहत देने की तैयारी कर रहा है। सत्यापित मजदूरों की आईडी दोबारा सक्रिय करने के लिए जल्द ही पोर्टल खोला जाएगा, जहाँ मजदूर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। वहीं, मंत्री विज ने स्पष्ट कर दिया है कि इस घोटाले के पीछे शामिल ‘काली भेड़ों’ (दोषियों) को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और आने वाले दिनों में विभाग की अन्य संदिग्ध योजनाओं की भी विस्तृत जांच की जाएगी।

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