HC का बड़ा फैसला: एक ही FIR में दोबारा गिरफ्तारी पर बार-बार ‘कारण’ बताना जरूरी नहीं

Haryana

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी आरोपित को एक ही एफआईआर (FIR) के मामले में पहले ही गिरफ्तारी के आधार (Grounds of Arrest) बता दिए गए हैं, तो उसी मामले में दोबारा गिरफ्तारी के समय उन कारणों को फिर से दोहराना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि एक बार जानकारी दे देने से न्यायिक प्रक्रिया का मूल उद्देश्य सफल हो जाता है।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला फरवरी 2026 में भिवानी के सिविल लाइंस थाने में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। आरोपितों पर कोर्ट परिसर में गोलीबारी जैसे गंभीर आरोप थे।

  • पहली गिरफ्तारी: घटना वाले दिन ही आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन तकनीकी कारणों (आधार विधिवत पेश न करने) से उनकी पहली गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर दिया गया था।

  • दूसरी गिरफ्तारी: उसी दिन शाम को पुलिस ने कानूनी अनुमति लेकर उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया।

याचिकाकर्ताओं की दलील और कोर्ट का रुख

याचिकाकर्ताओं ने ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’ (Habeas Corpus) याचिका दायर कर अपनी दूसरी गिरफ्तारी को अवैध बताया था। उनका तर्क था कि दोबारा गिरफ्तारी के समय उन्हें नए सिरे से कारण नहीं बताए गए।

जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने इस दलील को खारिज करते हुए रिकॉर्ड का विश्लेषण किया:

  1. समय का मिलान: पहली सुनवाई के दौरान दोपहर 3:20 से 3:35 बजे के बीच आरोपितों को गिरफ्तारी के आधार बता दिए गए थे।

  2. दोबारा पेशी: शाम 6:20 बजे दोबारा गिरफ्तारी हुई और रात 8 बजे उन्हें फिर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।

  3. नियम की पालना: हाई कोर्ट ने पाया कि मजिस्ट्रेट के सामने पेशी से कम से कम दो घंटे पहले लिखित आधार देने का नियम इस मामले में पूरा हो चुका था।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि आरोपितों पर अदालत परिसर में फायरिंग जैसे संगीन आरोप हैं और उनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि:

  • न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य आरोपित को उसकी गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराना है।

  • तकनीकी आधारों का सहारा लेकर गंभीर अपराधियों को राहत नहीं दी जा सकती।

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