गुरुग्राम: संसद में महिला आरक्षण संशोधन बिल गिरने के बाद अब हरियाणा की सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को घेरने के लिए भाजपा सरकार ने 27 अप्रैल को हरियाणा विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। गुरुग्राम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में इस फैसले पर मुहर लगा दी गई है।
विपक्ष के खिलाफ आएगा ‘निंदा प्रस्ताव’
विशेष सत्र बुलाने का मुख्य उद्देश्य संसद में बिल का विरोध करने वाले विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास करना है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने बिल को गिराकर महिलाओं के अधिकारों और उनके सशक्तिकरण के रास्ते में बाधा उत्पन्न की है। इस सत्र के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामे होने के पूरे आसार हैं।
सीएम नायब सैनी का विपक्ष पर तीखा प्रहार
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष पर कड़ा हमला बोला। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु:
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भरोसा तोड़ने का आरोप: सीएम ने कहा कि 17 अप्रैल को विपक्ष ने देश की महिलाओं के विश्वास और उम्मीदों को तोड़ने का काम किया है।
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अपमान की राजनीति: उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और टीएमसी जैसे दलों ने भारतीय नारी शक्ति का उपहास उड़ाया है और अपना असली चेहरा दिखा दिया है।
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ऐतिहासिक संदर्भ: मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2015 में हरियाणा की धरती (पानीपत) से ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ की शुरुआत की थी। अब जब महिलाओं को आरक्षण देने का कदम उठाया गया, तो विपक्ष ने उसमें अड़ंगा डाल दिया।
क्यों अहम है यह विशेष सत्र?
यह विशेष सत्र केवल एक औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि भाजपा इसे राज्य में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है। चूंकि हरियाणा में महिलाओं का वोट बैंक काफी निर्णायक है, इसलिए सरकार इस निंदा प्रस्ताव के जरिए जनता के बीच यह संदेश देना चाहती है कि विपक्ष महिला विरोधी है।