Haryana Desk: हरियाणा के बहुचर्चित आईडीएफसी (IDFC) बैंक घोटाले में प्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीसरे आरोपी अधिकारी को भी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) के वित्त एवं लेखाधिकारी राजेश सांगवान पर यह गाज गिरी है।
तीसरा अधिकारी बर्खास्त
हरियाणा सरकार इससे पहले इस घोटाले में शामिल दो अन्य लेखा अधिकारियों को बर्खास्त कर चुकी है। राजेश सांगवान पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रखकर बैंक खाते खोले और बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया।
घोटाले की परतें और गबन का तरीका
विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच में इस सुनियोजित घोटाले के कई चौंकाने वाले पहलू सामने आए हैं:
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फर्जी तरीके से खाते खोलना: सांगवान ने बिना किसी ‘कोटेशन’ या प्रक्रिया के नियमों के विरुद्ध आईडीएफसी बैंक में खाते खुलवाए।
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दिशानिर्देशों की अनदेखी: वित्त विभाग द्वारा जुलाई 2025 में बैंक खातों की डिटेल मांगी गई थी, लेकिन सांगवान ने इसका कोई जवाब नहीं दिया।
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शेल कंपनियों को ट्रांसफर: जांच में पाया गया कि सरकारी धन को अवैध रूप से ‘एसआर जार प्लानिंग प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘मन्नत कंस्ट्रक्शन’ जैसी शेल कंपनियों के खातों में भेजा गया।
10 करोड़ का संदिग्ध लेन-देन
अभिलेखों के अनुसार, जनवरी 2026 में करीब 10 करोड़ रुपये का संदिग्ध ट्रांजेक्शन किया गया। इसमें 9.75 करोड़ रुपये आरटीजीएस (RTGS) के जरिए और बाकी रकम ट्रांसफर के जरिए भेजी गई। राजेश सांगवान इन खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) थे और उन्होंने बैंक कर्मचारी के फोन आने पर इन संदिग्ध ट्रांजेक्शन को मंजूरी दी थी।
गिरफ्तारी और एसीबी की जांच
राजेश सांगवान को एसीबी ने 14 मार्च को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि इस हेराफेरी के बदले सांगवान को अवैध रूप से मोटी रकम मिली थी, जिसे मुख्य आरोपियों ने भी स्वीकार किया है।सरकार की इस सख्त कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस अब बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की भी गहराई से जांच कर रही है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।