हैलो दोस्तों! स्वागत है आपका हमारे चैनल MSTV India पर, जहां हम राजनीति की हर बड़ी खबर को दिलचस्प तरीके से परोसते हैं। आज की ये खबर हरियाणा की राजनीति में तूफान ला सकती है! हरियाणा की सियासत में एक बार फिर भूपेंद्र हुड्डा का नाम गूंज रहा है! कांग्रेस ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने का मन बना लिया है, लेकिन क्या ये फैसला जाट बिरादरी के लिए आग में घी डालने वाला साबित होगा? जाट समुदाय में हुड्डा पिता-पुत्र को लेकर गुस्सा क्यों है?
क्या जाट होंगे नाराज़?
हरियाणा में कांग्रेस ने आखिरकार 10 महीने की देरी के बाद बड़ा फैसला लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विधायक दल (CLP) का नेता बनाने की तैयारी है। 37 में से ज्यादातर विधायकों का समर्थन हुड्डा के साथ है, और कांग्रेस हाईकमान ने भी इस पर हरी झंडी दे दी है। लेकिन इस फैसले ने हरियाणा की सियासत में हलचल मचा दी है। खासकर जाट समुदाय, जो हरियाणा की 26-28% आबादी का हिस्सा है, इस फैसले से खासा नाराज़ दिख रहा है। आखिर क्यों? चलिए, इसकी जड़ तक जाते हैं!
क्या जाट समुदाय कांग्रेस के इस फैसले के खिलाफ बगावत करेगा? या फिर हुड्डा की सियासी ताकत जाटों को फिर से अपने साथ लाएगी? ये सवाल हर किसी के दिमाग में है। आइए, इसकी तह तक जाते हैं!
जाट समुदाय की नाराज़गी का कारण
जाट समुदाय का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि हुड्डा परिवार ने केवल रोहतक और सोनीपत जैसे अपने गढ़ों पर ध्यान दिया। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का कहना है कि हुड्डा ने जाट समुदाय की मज़बूरी का फायदा उठाया, लेकिन पूरे समुदाय की स्वीकार्यता हासिल नहीं की। कुछ जाट मतदाताओं का मानना है कि हुड्डा की नीतियों ने जाट समुदाय को सियासी तौर पर कमज़ोर किया। मिसाल के तौर पर, सोनीपत में ब्राह्मण सांसद बनने के बाद भी कांग्रेस का प्रदर्शन कमज़ोर रहा, जिसे जाटों ने हुड्डा की रणनीति की नाकामी माना।
तो दोस्तों, क्या भूपेंद्र हुड्डा का CLP लीडर बनना जाट समुदाय के लिए गलत साबित होगा, या फिर वो कांग्रेस को नई ताकत देंगे? आपकी राय कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं!
