चंडीगढ़: हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री और पूर्व ओलंपियन संदीप सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में जिला अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने अभियोजन पक्ष (Prosecution) की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें मामले में रेप के प्रयास की धाराएं जोड़ने और केस को सत्र अदालत (Sessions Court) भेजने की मांग की गई थी।
अदालत का फैसला और अगली कार्रवाई
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले का ट्रायल अब मजिस्ट्रेट अदालत में ही जारी रहेगा।
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अगली सुनवाई: इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मई की तारीख तय की गई है।
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अर्जी खारिज: अभियोजन पक्ष ने आईपीसी की धारा 376 (रेप) को धारा 511 के साथ जोड़कर केस को बड़ी अदालत में ट्रांसफर करने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।
अभियोजन पक्ष की दलीलें
सरकारी पक्ष का तर्क था कि पीड़िता द्वारा धारा 164 के तहत दिए गए बयानों और कोर्ट में हुई शुरुआती पूछताछ के आधार पर आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप बनते हैं। उनके अनुसार, उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्य धारा 376/511 के तहत अपराध की ओर इशारा करते हैं, इसलिए मामले की सुनवाई सत्र अदालत में होनी चाहिए।
बचाव पक्ष का पलटवार
संदीप सिंह के वकील ने इन आरोपों का कड़ा विरोध करते हुए निम्नलिखित तर्क दिए:
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कोई ठोस सबूत नहीं: बचाव पक्ष ने कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो यह साबित करे कि यह रेप के प्रयास का मामला है।
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पुरानी शिकायत का हवाला: वकील के अनुसार, पीड़िता ने अपनी शुरुआती पुलिस शिकायत और FIR में ऐसे किसी भी आरोप का जिक्र नहीं किया था।
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पुरानी अर्जी का संदर्भ: कोर्ट को बताया गया कि इसी तरह की अर्जी पहले भी 29 जुलाई 2024 को खारिज की जा चुकी है, जिसे किसी भी उच्च अदालत में चुनौती नहीं दी गई थी।