चंडीगढ़: हरियाणा के निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत दाखिला प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। शिक्षा निदेशालय के आदेशानुसार, आज सभी निजी स्कूलों को पोर्टल पर यह स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने आवंटित किए गए कितने बच्चों को प्रवेश दिया है और किन कारणों से दाखिले रद्द किए गए हैं।
दाखिलों का गणित: आवेदन से अलॉटमेंट तक
इस शैक्षणिक सत्र में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आए थे। विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
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कुल आवेदन: 41,045 छात्रों ने पंजीकरण कराया था।
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पात्र छात्र: दस्तावेजों की जांच के बाद मुख्यालय ने 31,009 बच्चों को पात्र पाया।
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स्कूल अलॉटमेंट: अंतिम चरण के बाद केवल 21,752 बच्चों को ही स्कूल आवंटित किए जा सके।
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रद्द आवेदन: तकनीकी खामियों के कारण 1,804 आवेदनों को खारिज कर दिया गया।
कक्षावार स्थिति: पहली कक्षा में सबसे ज्यादा उत्साह
दाखिले की दौड़ में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धा पहली कक्षा में देखी गई।
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पहली कक्षा: 8,538 आवेदनों में से 7,680 बच्चों को स्कूल मिले।
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UKG: 4,561 आवेदनों में से 1,909 बच्चों को सीट मिली।
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LKG: 4,602 आवेदनों में से केवल 1,283 बच्चे ही सीट हासिल कर पाए।
बिना ठोस कारण दाखिला रद्द किया तो होगी कार्रवाई
शिक्षा निदेशालय अब इस बात की सघन जांच (Scrutiny) करेगा कि अलॉटमेंट के बाद वास्तव में कितने बच्चों का एडमिशन हुआ है। अक्सर यह शिकायतें मिलती हैं कि निजी स्कूल कागजी कार्रवाई या अन्य बहानों से गरीब बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी करते हैं।
विभाग की चेतावनी: हिसार समेत प्रदेश के सभी जिलों में आज से डेटा की समीक्षा शुरू हो जाएगी। यदि किसी भी निजी स्कूल ने निदेशालय द्वारा भेजे गए बच्चे का दाखिला बिना किसी वाजिब कारण के रद्द किया है, तो विभाग उस स्कूल के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है। स्कूलों के पास अपना डेटा अपडेट करने के लिए रविवार रात 12 बजे तक का समय था, जिसकी समीक्षा आज से शुरू हो रही है।