चंडीगढ़: हरियाणा के चर्चित 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी कार्रवाई को बेहद तेज कर दिया है। मंगलवार को सीबीआई की टीम ने दो वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों से करीब 4 घंटे तक कड़ी पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, इनमें से एक आईएएस अधिकारी पर गिरफ्तारी की गाज कभी भी गिर सकती है। जांच एजेंसी को इस अधिकारी और बैंक कर्मचारियों के बीच अवैध वित्तीय लेन-देन के पुख्ता सबूत मिले हैं।

डिजिटल सबूतों से खुली पोल: फोन डेटा और व्हाट्सऐप चैट जब्त

इस पूरे घोटाले की जांच में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट तब आया जब सीबीआई ने संदिग्ध अधिकारियों के डिजिटल डिवाइसेज (कंप्यूटर और मोबाइल) को अपने कब्जे में लिया। फॉरेंसिक जांच और डिलीट किए गए डेटा की रिकवरी से कई चौंकाने वाले राज खुले हैं:

ऑडियो रिकॉर्डिंग में कई बड़े नाम, 17-A की मंजूरी की कवायद तेज

जांच एजेंसी के हाथ कुछ ऐसी ऑडियो और डिजिटल रिकॉर्डिंग्स भी लगी हैं, जिनमें सरकारी फंड ट्रांसफर करने, अवैध बैंक खातों का संचालन करने और कानूनी कार्रवाई से बचने के तरीकों पर चर्चा की जा रही है। इन रिकॉर्डिंग्स में कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नामों का भी खुलासा हुआ है।

हरियाणा ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप, सीएम सैनी का ‘जीरो टॉलरेंस’ संदेश

जैसे-जैसे सीबीआई की जांच का दायरा बढ़ रहा है, हरियाणा की अफसरशाही (Bureaucracy) में जबरदस्त हड़कंप मच गया है। प्रशासनिक गलियारों में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर आईएएस अधिकारियों के खिलाफ हो रही इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं।

बैकग्राउंड: इस महा-घोटाले का खुलासा होने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए पहले इस केस को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और बाद में इसकी गंभीरता को देखते हुए सीबीआई (CBI) को सौंप दिया था। एक साथ 8 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ 17-ए की मंजूरी देकर सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में कुछ बड़ी गिरफ्तारियां तय मानी जा रही हैं।

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