चंडीगढ़। पंजाब में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा घोटाला सामने आया है। किसानों की सहमति के बिना उनकी जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये के मेगा प्रोजेक्ट खड़े करने के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी के सचिव अजय सहगल को 22 मई (शुक्रवार) को गिरफ्तार कर लिया है।
कैसे खुला फर्जीवाड़े का खेल?
यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब पंजाब के कई किसानों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई:
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किसानों का आरोप: उन्होंने अपनी कृषि भूमि के व्यावसायिक इस्तेमाल यानी CLU (Change of Land Use) के लिए कभी कोई मंजूरी नहीं दी थी। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उनके नाम के सहमति पत्र (कंसेंट लेटर) जमा करा दिए गए।
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फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे: पंजाब पुलिस की एफआईआर के बाद जब ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की, तो पता चला कि अजय सहगल और उसके सहयोगियों ने करीब 30.5 एकड़ जमीन से जुड़े 15 किसानों के नकली सहमति पत्र तैयार किए थे। सरकारी अधिकारियों को गुमराह करने के लिए इन कागजातों पर किसानों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए और नकली अंगूठे के निशान लगाए गए थे।
फर्जी CLU के दम पर बने ‘संटेक सिटी’ समेत 3 बड़े प्रोजेक्ट्स
जांच एजेंसी के मुताबिक, इसी जालसाजी के जरिए हासिल की गई सीएलयू मंजूरी के आधार पर एक नहीं बल्कि तीन बड़े प्रोजेक्ट्स खड़े कर दिए गए:
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संटेक सिटी (Suntec City): इस मुख्य रियल एस्टेट मेगा प्रोजेक्ट को फर्जी दस्तावेजों के सहारे ही विकसित किया गया और बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग व निर्माण शुरू हुआ।
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ला कैनेला (La Canela): यह एक रिहायशी मल्टी-स्टोरी (बहुमंजिला) प्रोजेक्ट है, जिसे नियमों को ताक पर रखकर बनाया गया।
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डिस्ट्रिक्ट 7 (District 7): यह एक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स है, जिसकी दुकानें और यूनिट्स बिना जरूरी कानूनी प्रक्रिया के बेची जा रही थीं।
रेरा (RERA) नियमों का उल्लंघन: ईडी ने खुलासा किया है कि इन प्रोजेक्ट्स में फ्लैटों और दुकानों की बिक्री उस समय ही शुरू कर दी गई थी, जब तक इन्हें रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) से जरूरी मंजूरी और रजिस्ट्रेशन तक नहीं मिला था।
जब रेड के दौरान बालकनी से फेंके गए 21 लाख रुपये
इस घोटाले की कड़ियां जोड़ने के लिए ईडी ने 7 मई 2026 को इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी और एबीएस टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 8 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी।
इस छापेमारी के दौरान एक बेहद अजीब वाकया देखने को मिला। जांच से घबराकर इमारत की बालकनी से करीब 21 लाख रुपये नकद नीचे सड़क पर फेंक दिए गए। नोट बालकनी के नीचे सुरक्षा के लिए लगी जाली से छनकर सड़क पर बिखर गए, जिन्हें बाद में ईडी के अधिकारियों ने पूरे इलाके को घेरकर बरामद किया।
वहीं जांच में यह भी सामने आया है कि नियमानुसार इन बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS कैटेगरी) के लिए जो प्लॉट आरक्षित रखने अनिवार्य होते हैं, उन्हें बिल्डर्स द्वारा अब तक ‘ग्माडा’ (GMADA) को नहीं सौंपा गया था।
अब GMADA और टाउन प्लानिंग विभाग के अधिकारी भी रडार पर
ईडी की जांच अब सिर्फ बिल्डर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि इस मामले ने रियल एस्टेट और सरकारी महकमे के बीच के कथित गठजोड़ को भी उजागर किया है:
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रिश्वतखोरी का शक: एजेंसी का दावा है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग और जीएमएडीए (GMADA) के कई अधिकारियों ने कथित तौर पर रिश्वत लेकर इन फर्जी दस्तावेजों को आंख मूंदकर मंजूरी दी।
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हल्की धाराओं का खेल: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में मामला उठने के बावजूद सिर्फ 30 एकड़ जमीन का आंशिक सीएलयू रद्द किया गया। आरोप है कि संटेक सिटी को अपने बाकी फ्लैट और प्लॉट बेचने का मौका देने के लिए पंजाब रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एक्ट की सख्त धारा 90 के बजाय जानबूझकर हल्की कार्रवाई वाली धारा 85 लगाई गई।