चंडीगढ़: हरियाणा को पूरी तरह नशा मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। सरकार ने प्रदेश के हर गांव और शहर में ‘एंटी ड्रग ज्वाइंट टास्क फोर्स’ (Anti-Drug Joint Task Force) गठित करने का फैसला किया है। इस विशेष फोर्स के जरिए नशा तस्करों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा। साथ ही, इस अभियान में पंचायतों, स्थानीय निकायों (Local Bodies) और आम समाज को जोड़कर एक बेहद मजबूत निगरानी तंत्र तैयार किया जाएगा।
तस्करी पर लगाम के साथ पुनर्वास और रोजगार पर फोकस
सरकार की यह योजना केवल नशामुक्त करने या तस्करों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत एक थ्री-टियर (Three-Tier) रणनीति पर काम किया जाएगा:
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कड़ी कार्रवाई: टास्क फोर्स के माध्यम से तस्करों के खिलाफ सख्त कानूनी एक्शन लिया जाएगा।
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पुनर्वास (Rehabilitation): नशे की लत छोड़ चुके युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए प्रदेश में नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
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कौशल विकास व रोजगार: युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) और रोजगार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि वे दोबारा इस दलदल में न फंसें।
जन-आंदोलन बनेंगे ‘सीनियर सिटीजन क्लब’
इस नशा विरोधी अभियान को एक सामाजिक आंदोलन का रूप देने के लिए सरकार हर जिले में सीनियर सिटीजन क्लब स्थापित करेगी। ये क्लब समाज में जागरूकता फैलाने और युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति सचेत करने में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे।
सफलता के चार मुख्य स्तंभ
हरियाणा सरकार का मानना है कि ‘नशा मुक्त हरियाणा’ का सपना तभी साकार हो सकता है जब इन चार मोर्चों पर एक साथ काम किया जाए:
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कानून का कड़ाई से पालन (Enforcement)
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सामाजिक सहभागिता (Social Participation)
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प्रभावितों का पुनर्वास (Rehabilitation)
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युवाओं के लिए रोजगार के अवसर (Employment)