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CM मान का वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी, अकाली दल ने रची बदनाम करने की साजिश: हरपाल सिंह चीमा

चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के कथित वायरल वीडियो मामले में श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश के बाद आज आम आदमी पार्टी (AAP) ने एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा और पार्टी के प्रवक्ता बलतेज पन्नू मौजूद रहे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरपाल सिंह चीमा ने मुख्यमंत्री मान के कथित वीडियो को पूरी तरह फर्जी करार देते हुए इसे पंजाब का माहौल और लोगों की भावनाएं भड़काने की एक बड़ी साजिश बताया।

अकाली दल पर राजनीतिक साजिश का आरोप

कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सीधे तौर पर शिरोमणि अकाली दल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर अकाली दल ने उन्हें बदनाम करने के लिए यह राजनीतिक साजिश रची है। चीमा ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी पंजाब में अकाली दल और भाजपा की सरकार रही, राज्य में गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी का दौर जारी रहा। उन्होंने अकाली दल के इतिहास को ‘कलंकित’ बताते हुए आरोप लगाया कि इन्होंने हमेशा सत्ता में रहकर काम करने की बजाय धर्म को मोहरा बनाया।

फॉरेंसिक जांच में हुआ खुलासा: वीडियो में सीएम मान नहीं

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हरपाल सिंह चीमा ने कथित वीडियो से जुड़ी दो महत्वपूर्ण फॉरेंसिक रिपोर्ट भी मीडिया के सामने पेश कीं। उन्होंने दावा किया कि इन रिपोर्टों में चेहरे के एंगल, कद, शारीरिक बनावट (बॉडी स्ट्रक्चर) और अन्य तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की गई है। जांच रिपोर्ट में यह साफ हो गया है कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम मान की छवि खराब करने के लिए किसी एक्टर या हमशक्ल को खड़ा करके यह फर्जी वीडियो तैयार किया गया था।

1191 अलग-अलग एंगल से की गई जांच

चीमा ने तकनीकी विवरण साझा करते हुए बताया कि सच्चाई सामने लाने के लिए मुख्यमंत्री मान के शरीर और चेहरे के 1191 अलग-अलग एंगल्स का मिलान इस वीडियो से करवाया गया था। मुख्यमंत्री के चलने, खड़े होने और उनके हाव-भाव की गहन जांच की गई, जो वीडियो से बिल्कुल अलग पाए गए।

भारत सरकार से मान्यता प्राप्त लैब्स से आई रिपोर्ट

कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस कथित वीडियो की जांच पंजाब से बाहर की दो अलग-अलग लैब्स से करवाई गई है। ये दोनों ही लैब्स भारत सरकार (Government of India) से मान्यता प्राप्त (Approved) हैं। सरकारी लैब्स की इन रिपोर्टों ने यह साबित कर दिया है कि यह वीडियो पूरी तरह से फेक और एडिटेड है, जिसे सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक दुर्भावना के तहत फैलाया गया था।

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