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IDFC बैंक घोटाला अपडेट: सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़, 11 गिरफ्तार

Haryana Desk: चंडीगढ़ से शुरू हुए इस बड़े बैंकिंग घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अब तक की जांच में सरकारी धन को ठिकाने लगाने वाले एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।

फर्जी कंपनियों का मकड़जाल
जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि घोटाले के मास्टरमाइंड ने आर.एस. ट्रेडर्स और कैपको फिंटेक सर्विसेज जैसी कई शेल (फर्जी) कंपनियां बनाई थीं। सरकारी विभागों से पैसा सीधे इन कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया जाता था। ए.डी.जी.पी. चारू बाली के अनुसार, बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी करने के लिए फर्जी डेबिट मेमो का सहारा लिया गया ताकि किसी को शक न हो।

अब तक की बड़ी कार्रवाई: आंकड़े और गिरफ्तारियां

  • विजीलैंस ब्यूरो ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है:
  • 11 गिरफ्तारियां: इनमें 6 बैंक कर्मचारी, 4 निजी व्यक्ति और 1 सरकारी कर्मचारी शामिल है।
  • 100+ बैंक खाते: जांच एजेंसी ने 100 से अधिक संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज (Debit Freeze) करने की सिफारिश की है।
  • 12 सरकारी खाते: अब तक 8 अलग-अलग विभागों के 12 बैंक खातों में अवैध लेनदेन की पुष्टि हुई है।
  • छापेमारी: 16 ठिकानों पर की गई रेड में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और संपत्तियों के पेपर मिले हैं।

अपराध की कमाई से खड़ी की ‘ऐश-ओ-आराम’ की दुनिया
जांच टीम ने उन संपत्तियों की भी पहचान की है जिन्हें घोटाले के पैसे से खरीदा गया था। अधिकारियों ने 10 संपत्तियों और 6 लग्जरी वाहनों को चिह्नित किया है, जिन्हें जल्द ही कुर्क किया जा सकता है। इसके अलावा, जब्त किए गए 25 इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को साइबर फॉरेंसिक लैब भेजा गया है, ताकि डिजिटल सबूतों के जरिए मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुँचा जा सके।

जांच का अगला चरण
विजीलैंस विभाग अब उन अन्य सरकारी अधिकारियों की सूची तैयार कर रहा है जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है। ब्यूरो का कहना है कि यह घोटाला सिर्फ चंडीगढ़ तक सीमित नहीं है, इसके तार अन्य शहरों से भी जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।

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