HomeUncategorizedअलविदा 'शटल क्वीन': साइना नेहवाल ने किया संन्यास का ऐलान

अलविदा ‘शटल क्वीन’: साइना नेहवाल ने किया संन्यास का ऐलान

Sports Desk: भारत की पहली बैडमिंटन सनसनी साइना नेहवाल ने आखिरकार खेल से अपने संन्यास की पुष्टि कर दी है। साइना ने साझा किया कि अब उनका शरीर अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल का दबाव झेलने में सक्षम नहीं है, जिसके चलते उन्होंने यह कठिन फैसला लिया है।

“अपनी शर्तों पर विदा ले रही हूँ”

एक पॉडकास्ट के दौरान साइना ने भावुक होते हुए कहा, “मैंने असल में दो साल पहले ही खेलना छोड़ दिया था। मुझे लगा कि जब मैंने अपनी शर्तों पर खेलना शुरू किया था, तो विदा भी अपनी शर्तों पर ही लूंगी। इसके लिए किसी औपचारिक घोषणा की जरूरत महसूस नहीं हुई।” उन्होंने आगे कहा कि जब आप शारीरिक रूप से खेलने में सक्षम न हों, तो उसे स्वीकार कर लेना ही बेहतर है।

चोट और संघर्ष का दौर

साइना का करियर उपलब्धियों से भरा रहा, लेकिन चोटों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा:

  • रियो 2016 की चोट: रियो ओलंपिक के दौरान घुटने की गंभीर चोट ने उनके करियर की गति धीमी कर दी थी।

  • वापसी का जज्बा: चोट के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 2017 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य व 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी ताकत दिखाई।

  • आर्थराइटिस की समस्या: 2024 में उन्होंने खुलासा किया कि वह आर्थराइटिस से जूझ रही हैं और उनके घुटनों का कार्टिलेज पूरी तरह घिस चुका है, जिससे शीर्ष स्तर पर वापसी असंभव हो गई।


उपलब्धियों का सुनहरा सफर: एक नजर में

साइना नेहवाल ने भारतीय बैडमिंटन को वैश्विक मानचित्र पर पहचान दिलाई। उनकी प्रमुख उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:

उपलब्धि विवरण
ओलंपिक पदक 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक (बैडमिंटन में भारत का पहला ओलंपिक पदक)।
विश्व रैंकिंग अप्रैल 2015 में दुनिया की नंबर 1 खिलाड़ी बनीं (पहली भारतीय महिला)।
विश्व चैंपियनशिप 2015 में रजत (Silver) और 2017 में कांस्य (Bronze) पदक जीता।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 और 2018 में एकल वर्ग (Singles) में स्वर्ण पदक
BWF खिताब इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और हांगकांग ओपन जैसे कई सुपर सीरीज खिताब।
ऐतिहासिक जीत 2008 में वर्ल्ड जूनियर चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय।

सम्मान और पुरस्कार

भारत सरकार ने उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च खेल और नागरिक सम्मानों से नवाजा:

  • खेल रत्न (2009)

  • पद्म श्री (2010)

  • पद्म भूषण (2016)

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