स्पोर्ट्स डेस्क: भारतीय टेस्ट टीम के मुख्य कोच (Head Coach) के रूप में गौतम गंभीर की राह बेहद चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। सीमित ओवरों के (व्हाइट बॉल) क्रिकेट में टीम इंडिया का प्रदर्शन भले ही शानदार रहा हो, लेकिन लाल गेंद से खेले जाने वाले टेस्ट प्रारूप में टीम की नाकामी के बाद कोचिंग कोचिंग स्टाइल और गंभीर की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, पूर्व भारतीय लेग स्पिनर अमित मिश्रा गंभीर के समर्थन में आए हैं और उनका मानना है कि इस विफलता का पूरा ठीकरा अकेले हेड कोच पर फोड़ना गलत है।
टेस्ट में लगातार झटकों से निशाने पर आए गंभीर
गौतम गंभीर के कार्यकाल के दौरान भारतीय टेस्ट टीम का ग्राफ लगातार नीचे गिरा है। न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर मिली 0-3 की करारी हार के बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी भारत को अपने ही घर में 0-2 से क्लीन स्वीप की शिकस्त झेलनी पड़ी। वहीं, ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 1-3 से गंवाने और इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज 2-2 पर समाप्त होने के चलते वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के मौजूदा चक्र में भारत का समीकरण बेहद डगमगा गया है।
‘अलग-अलग कोच की जरूरत नहीं, खिलाड़ियों को उठानी होगी जवाबदेही’
टीम के निराशाजनक नतीजों के बीच अलग-अलग फॉर्मेट्स के लिए अलग कोच (Split Coaching) की चर्चाएं तेज हो गई हैं। लेकिन अमित मिश्रा इस राय से इत्तेफाक नहीं रखते। मिश्रा ने दोटूक कहा कि मैदान पर नतीजा खिलाड़ियों को देना होता है।
अमित मिश्रा ने कहा, “कोच के लिए यह काफी मुश्किल दौर होता है। मेरी नजर में खिलाड़ियों को अपनी भूमिका की अधिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। भारत में सालों से तीनों प्रारूपों का एक ही कोच रहा है और किसी भी नए कोचिंग सेटअप को बेहतर नतीजे देने के लिए वक्त मिलना ही चाहिए।”
द्रविड़ का दिया उदाहरण, युवा टीम को समय देने की पैरवी
मिश्रा ने टीम के बदलाव के दौर (Transition Phase) का हवाला देते हुए पूर्व कोच राहुल द्रविड़ का उदाहरण दिया। उन्होंने समझाया कि राहुल द्रविड़ को भी भारतीय टीम का सिस्टम और कल्चर स्थापित करने में लगभग एक से डेढ़ साल का समय लगा था, जिसके बाद ही प्रदर्शन में निखार आया।
उन्होंने आगे कहा, “मौजूदा टेस्ट टीम में कई नए और कम अनुभवी युवा खिलाड़ी शामिल हैं। कोच और खिलाड़ियों को एक-दूसरे के साथ ढलने में समय लगता है।”
“140 करोड़ में से चुने गए हैं खिलाड़ी, परिस्थितियों से ढलना सीखें”
अमित मिश्रा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल रहे भारतीय खिलाड़ियों को मैच के हालात के हिसाब से खुद में सुधार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “आप देश की 140 करोड़ से अधिक की आबादी में से चुने जाते हैं। पिच के बर्ताव और मैच के मिजाज को समझकर खेलना खिलाड़ियों की अपनी काबिलियत का हिस्सा होना चाहिए। इसीलिए मुझे नहीं लगता कि टेस्ट टीम की नाकामियों के लिए सीधे तौर पर कोच को कसूरवार ठहराया जाना चाहिए।”


