चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पंजाब कांग्रेस विधायक दल के नेता (LoP) प्रताप सिंह बाजवा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री व चंडीगढ़ से मौजूदा सांसद मनीष तिवारी की नाराजगी का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया है। मनीष तिवारी लंबे समय से पंजाब कांग्रेस की महत्वपूर्ण समितियों और नियुक्तियों में खुद की अनदेखी किए जाने से नाराज चल रहे हैं।
बाजवा का बयान: ‘तिवारी के अनुभव की 2027 चुनाव में जरूरत’
प्रताप सिंह बाजवा ने पहली बार सार्वजनिक मंच से मनीष तिवारी के पक्ष में खड़े होकर कहा कि मनीष तिवारी एक बेहद अनुभवी और वरिष्ठ नेता हैं। सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके विशाल अनुभव का लाभ पार्टी को आगामी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों में जरूर उठाना चाहिए।बाजवा ने भरोसा दिलाया कि मनीष तिवारी की भावनाओं और उनकी शिकायतों को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व (हाईकमान) के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा।
क्यों शुरू हुआ विवाद?
दरअसल, 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पंजाब कांग्रेस में हाल ही में गठित की गई समितियों और रणनीतिक पदों पर मनीष तिवारी को शामिल नहीं किया गया था। इस अनदेखी पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति जताई थी। बाजवा पंजाब के पहले ऐसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता बन गए हैं, जिन्होंने खुलकर तिवारी की इस नाराजगी को जायज ठहराया है।
रंधावा का तटस्थ रुख
दूसरी ओर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने इस मसले पर सधा हुआ रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि “पार्टी से जुड़े सभी बड़े और नीतिगत फैसले केवल हाईकमान लेता है, इसलिए इस विषय पर आगे कुछ भी कहना उचित नहीं होगा।”


