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पंजाब विधानसभा चुनाव: ‘बंदी सिखों’ की रिहाई पर हाईकमान से नीति स्पष्ट चाहती है पंजाब भाजपा

चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी के प्रदेश नेता उन प्रमुख मुद्दों पर गहन चिंतन-मंथन में जुटे हैं, जिन्हें मतदाताओं के बीच लेकर जाना है। इस रणनीति में ‘बंदी सिखों की रिहाई’ एक अत्यंत संवेदनशील और अहम मुद्दा बनकर उभरा है। इस मसले पर पार्टी की स्पष्ट नीति (पार्टी लाइन) क्या होगी, इसे लेकर पंजाब भाजपा के नेता केंद्रीय हाईकमान से स्पष्टता चाहते हैं।

भावनाओं से जुड़ा है बंदी सिखों का मसला
पंजाब में बंदी सिखों की रिहाई का मामला बेहद गंभीर है और यह सूबे के एक बड़े वर्ग की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (SAD) जैसे दल इस मुद्दे को संसद तक उठाते रहे हैं, जबकि कई सिख संगठन अपनी सजा पूरी कर चुके कैदियों की रिहाई के लिए महीनों से मोर्चे लगाए बैठे हैं। पंजाब भाजपा के नेता जानते हैं कि चुनावों में यह मुद्दा विपक्ष का मुख्य हथियार होगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि चुनाव से पहले केंद्र सरकार कानूनी और वैधानिक तरीके से कुछ बंदी सिखों को रिहा करने पर विचार कर सकती है।

तीन आंतरिक सर्वे पूरे, एसी कमरों से बाहर निकलेंगे नेता
चुनावी तैयारियों को परखने के लिए भाजपा इस साल पंजाब की प्रत्येक सीट पर तीन आंतरिक सर्वे करवा चुकी है। पिछले दिनों दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ पंजाब के वरिष्ठ नेताओं की ‘सीट-टू-सीट’ समीक्षा बैठक भी हुई थी। हाईकमान ने साफ कर दिया है कि अब केवल काम के आधार पर ही नेताओं और कार्यकर्ताओं की परफॉर्मेंस तय होगी। पंजाब फतह करने के लिए नेताओं को एसी कमरे छोड़कर फील्ड में सक्रिय होना पड़ेगा और सकारात्मक परिणाम देने होंगे। चर्चा यह भी है कि अन्य दलों के कई कद्दावर नेता जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं।

बूथ स्तर पर होगी ब्रेनस्टॉर्मिंग, इन मुद्दों पर रहेगा ध्यान
चुनाव में जिन मुद्दों को जनता के बीच ले जाना है, उनकी जमीनी समझ बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक पहुंचाने के लिए भाजपा देश भर में ब्रेनस्टॉर्मिंग (वैचारिक सत्र) आयोजित करेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इन सत्रों की शुरुआत कर दी है। पार्टी जिन मुख्य मुद्दों को लेकर मैदान में उतरेगी, उनमें शामिल हैं:

  • किसान और कृषि संकट का समाधान

  • युवाओं का भविष्य और नशे की समस्या पर लगाम

  • सीमा पार से हथियारों की तस्करी और बिगड़ती कानून-व्यवस्था

  • राज्य की कमजोर वित्तीय स्थिति और पंजाब को समृद्ध व प्रगतिशील बनाना।

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