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लुधियाना में शिवसेना नेता राजीव टंडन के काफिले पर हमला, निहंगों ने पायलट गाड़ी का शीशा तोड़ा; कृपाण पर पाबंदी की मांग को लेकर गरमाई सियासत

लुधियाना: पंजाब के लुधियाना में सोमवार को उस समय भारी तनाव फैल गया, जब प्रदर्शनकारी निहंग सिंहों ने शिवसेना पंजाब के प्रमुख राजीव टंडन के काफिले को जबरन रोक लिया। प्रदर्शनकारियों ने टंडन की सुरक्षा में तैनात पायलट वाहन को निशाना बनाते हुए उसकी खिड़की का शीशा चकनाचूर कर दिया। मौके पर तैनात पुलिस बल ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत मोर्चा संभाला और निहंगों को पीछे धकेलकर शिवसेना नेता को सुरक्षित बाहर निकाला।

शिवसेना का पुलिस कमिश्नर दफ्तर पर प्रदर्शन
इस हमले से आक्रोशित शिवसेना कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने बड़ी संख्या में पुलिस कमिश्नर कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना दे दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि यह राजीव टंडन की हत्या की एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने हमलावरों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करने की मांग की। माहौल को बिगड़ता देख पुलिस कमिश्नर ने खुद प्रदर्शनकारियों से बात की और उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया। पुलिस ने तोड़फोड़ के आरोप में एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
यह घटना फ्रेंड्स रीजेंसी के पास उस समय हुई,
जब विभिन्न सिख संगठन एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर चेतन शर्मा द्वारा सिख महापुरुषों और धार्मिक आस्थाओं पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान वहां से गुजर रहे राजीव टंडन को प्रदर्शनकारियों ने पहचान लिया और उनकी गाड़ी को घेर लिया। स्थिति बिगड़ती देख सीआईए-1 और स्थानीय थानों की भारी पुलिस फोर्स को मौके पर बुलाया गया, जिसने बल प्रयोग कर टंडन के काफिले को सुरक्षित रवाना किया।

राजीव टंडन की नई मांग और सिख संगठनों की चेतावनी
घटना के बाद राजीव टंडन ने पुलिस में कोई भी औपचारिक शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया है। हालांकि,
उन्होंने एक नई मांग उठाते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर कृपाण ले जाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई जानी चाहिए, क्योंकि इसका दुरुपयोग कर आम लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। टंडन ने चेतावनी दी कि इस मुद्दे पर रणनीति बनाने के लिए शिवसेना जल्द ही राज्य स्तरीय बैठक बुलाकर आंदोलन करेगी।

दूसरी ओर, सिख संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है। वे इसी मामले की शिकायत दर्ज कराने कमिश्नर दफ्तर गए थे, लेकिन प्रशासनिक टालमटोल से नाराज होकर उन्होंने चक्का जाम किया था। सिख नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले तत्वों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई,

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