पलवल में BJP की अंदरूनी गुटबाजी आई सामने, कृष्णपाल गुर्जर vs गौरव गौतम

Haryana

दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि BJP जैसी अनुशासित पार्टी में भी गुटबाजी इतनी गहरी हो सकती है कि एक मंत्री को अपने ही इलाके के कार्यक्रम में न्योता तक न दिया जाए? जी हां! हरियाणा के पलवल में कुछ ऐसा हुआ है जो BJP की नींव हिला सकता है। खेल मंत्री गौरव गौतम और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के बीच की जंग अब खुलकर सामने आ गई है। अगर आप सोच रहे हैं कि ये सिर्फ अफवाह है, तो रुकिए… आज हम खोलेंगे इस राज़ की सारी परतें! चलिए शुरू करते हैं!

पलवल में क्या हुआ?


दोस्तों, बात है रविवार को पलवल की अनाज मंडी में होने वाली एक बड़ी जनसभा की। इसे नव वर्ष समारोह का नाम दिया गया है, लेकिन असल में ये एक पावर शो है! मुख्य अतिथि हैं केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर। पलवल, होडल, हथीन और पृथला से हजारों लोग बुलाए गए हैं। होडल विधायक हरेंद्र रामरतन, मार्केट कमेटी के चेयरमैन, पूर्व विधायक – सब वहां होंगे। लेकिन हैरानी की बात? पलवल के विधायक और खेल मंत्री गौरव गौतम को न्योता ही नहीं मिला! और BJP के जिला अध्यक्ष विपिन बैंसला? उन्हें भी बाहर रखा गया।


सोचिए, मंत्री जी का अपना गृह क्षेत्र, और उन्हें खबर तक नहीं? गौतम जी कहते हैं, “मुझे कोई जानकारी नहीं, मैं तो जनता के काम में लगा हूं।” लेकिन ये कितना बड़ा अपमान है!

गुटबाजी की जड़ें कितनी गहरी?


अब सवाल ये है – ये गुटबाजी नई है क्या? बिल्कुल नहीं! गौरव गौतम और कृष्णपाल गुर्जर के बीच सालों से खींचतान चल रही है। कभी मंच साझा नहीं करते, कभी सार्वजनिक तंज कसते हैं। हाल ही में गुर्जर जी ने होडल, हथीन और हसनपुर की मार्केट कमेटियों से गौतम समर्थित चेयरमैन को हटवाकर अपने लोगों को बिठा दिया। और 22 दिसंबर को लघु सचिवालय की दिशा कमेटी मीटिंग में तो हद हो गई – गुर्जर जी ने विपिन बैंसला को सबके सामने डांटा! बोले, “मीटिंग मैं ले रहा हूं, तुम मत बोलो!” बैंसला जी चेहरा छिपाते रहे।


दोस्तों, BJP यहां दो गुटों में बंट गई है। एक तरफ गुर्जर गुट: NIT विधायक सतीश फागना, बडखल विधायक धनेश अदलखा, बल्लभगढ़ विधायक मूलचंद शर्मा, पूर्व विधायक दीपक मंगला, और कई और। दूसरी तरफ ‘तिगड़ी’ गुट: फरीदाबाद विधायक विपुल गोयल, तिगांव विधायक राजेश नागर, और गौरव गौतम।
पोस्टरों में भी सिर्फ गुर्जर गुट के चेहरे – गौतम और बैंसला गायब! होडल विधायक कहते हैं, “ये पार्टी प्रोग्राम है, कोई गुटबाजी नहीं।” लेकिन सच्चाई तो सबके सामने है। क्या ये अनुशासन की बात करने वाली BJP है? राजनीतिक एक्सपर्ट कहते हैं, अगर ये कलह नहीं रुकी, तो संगठन और चुनावों पर असर पड़ेगा!
दोस्तों, ये सिर्फ पलवल की कहानी नहीं, ये BJP के भविष्य का सवाल है। क्या गुटबाजी पार्टी को कमजोर कर देगी? आप क्या कहते हैं? कमेंट्स में बताएं – गुर्जर गुट सही है या गौतम गुट?

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