चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा के बजट सत्र का तीसरा दिन भी भारी हंगामे और तीखी नोकझोंक के नाम रहा। सदन में 6 मार्च को दिए गए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के अभिभाषण पर जोरदार बहस देखने को मिली। दोपहर ढाई बजे के बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पंजाब में 10 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की जो योजना है, वैसी सुविधा तो विकसित देश कनाडा में भी नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोधी दल अब सिर्फ महीने गिन रहे हैं, जबकि उन्होंने अपने कार्यकाल में खुद कोई वादे पूरे नहीं किए। सीएम ने बिजली दरों में डेढ़ रुपये तक की कटौती को भी अपनी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताया।
सदन में कांग्रेस विधायक दल और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर जमकर हमले किए। उन्होंने महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये देने के चुनावी वादे को लेकर सरकार से सीधा सवाल पूछा। बाजवा ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार का कार्यकाल खत्म होने में अब सिर्फ एक साल बचा है, तो सीएम भगवंत मान अपनी बजट स्पीच में यह साफ करें कि क्या महिलाओं को पिछले चार साल के 48 हजार रुपये एक साथ मिलेंगे या फिर सरकार इस वादे से पल्ला झाड़ लेगी। इसके अलावा, बाजवा ने 2022-23 में 14 नए मेडिकल कॉलेज बनाने के वादे की याद दिलाते हुए कहा कि अब तक सिर्फ पांच के ही नाम सामने आए हैं और उनकी प्रोग्रेस के बारे में भी कुछ नहीं बताया गया है। उन्होंने सरकार से कम से कम बचे हुए 9 कॉलेजों के नाम बताने की मांग की। साथ ही बेअदबी मामलों को लेकर बनाए गए सख्त कानूनों को लागू न करने पर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
बहस के दौरान माहौल तब और गरमा गया जब प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि अगर उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है, तो क्या वे सदन से बाहर चले जाएं? इस पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तुरंत पलटवार करते हुए तंज कसा कि ‘पहले क्या आप हमसे पूछकर बाहर जाते थे?’ इस तीखी बहस के बीच जैसे ही मंत्री अमन अरोड़ा बोलने के लिए अपनी सीट से खड़े हुए, कांग्रेसी विधायकों ने सदन में भारी हंगामा शुरू कर दिया। कुछ देर तक चले इस शोर-शराबे और नोकझोंक के बाद कांग्रेसी विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
